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सीजेआई बीआर गवई की मां होंगी आरएसएस के विजयादशमी कार्यक्रम की मुख्य अतिथि

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारत के प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई की मां को अगले महीने महाराष्ट्र के अमरावती जिले में विजयादशमी और संगठन के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में होने वाले एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश की मां डॉ. कमलताई गवई को पांच अक्टूबर को अमरावती के किरण नगर इलाके स्थित श्रीमती नरसम्मा कॉलेज मैदान में संघ की अमरावती महानगर इकाई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।

कार्यक्रम में जे नंदा कुमार मुख्य होंगे मुख्य वक्ता

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम पांच अक्टूबर को अमरावती के किरण नगर में आयोजित किया जाएगा। इसे आएसएस की अमरावती महानगर इकाई आयोजित कर रही है। वरिष्ठ आरएसएस नेता जे नंदा कुमार इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता होंगे।

विजयादशमी के दिन हुई थी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना

बता दें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के दिन हुई थी। संगठन की स्थापना में महाराष्ट्र के नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी। संगठन इस साल अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। इसके लिए पूरे देश में एक लाख से ज्यादा ‘हिंदू सम्मेलन’ और हजारों संगोष्ठियां होंगी।

मोहन भागवत के संबोधन से होगी शताब्दी वर्ष की शुरुआत

शताब्दी वर्ष की शुरुआत 2 अक्टूबर को नागपुर में मोहन भागवत के वार्षिक विजयदशमी संबोधन से होगी। लोगों तक पहुंचने के लिए आरएसएस ने पूरे देश में घर-घर जाकर संपर्क करने का कार्यक्रम भी तय किया है।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।