लोड हो रहा है...

पीओके में जनमत संग्रह की मांग कर रहे लोगों पर पाकिस्तान की सेना ने की फायरिंग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुजफ्फराबाद. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार (26 सितंबर, 2025) को संयुक्त राष्ट्र महासभा में बयान दिया था कि पाकिस्तान कश्मीरियों के साथ खड़ा हुआ है और कश्मीर में जनमत संग्रह की मांग करता है, लेकिन इस बयान के अभी 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से पाकिस्तान की क्रूरता की तस्वीरें सामने आने लगी, जहां निहत्थे कश्मीरियों पर पाकिस्तान की पुलिस ने फायरिंग की और मारपीट की.

भारतीय समयानुसार, शनिवार (27 सितंबर, 2025) को सुबह 10 बजे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के कोटली इलाके के खोई रट्टा गांव में आम लोग 6 साल की बच्ची के साथ पिछले महीने हुए बलात्कार के मामले पर इंसाफ के लिए प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर की निर्दयी पुलिस ने लोगों को हटाने के लिए AK-47 से अंधाधुंध गोलीबारी की. साथ ही पत्रकारों के साथ मारपीट की और उनका सामान लूटा.

पुलिस के खिलाफ नारेबाजी

पाकिस्तानी पुलिस की इस बर्बरता में जानकारी के मुताबिक, 18 लोग गंभीर रूप से घायल हैं. साथ ही इलाके में पाकिस्तान की सरकार और पुलिस के खिलाफ लोग नारेबाजी कर रहे हैं और रैली निकाल रहे हैं. साथ ही स्थानीय लोगों ने पुलिस की क्रूरता के खिलाफ कोटली पुलिस स्टेशन में भी तोड़फोड़ की है और पथराव किया.

कश्मीरी नागरिकों में आजादी के नारे

इस हफ्ते ये दूसरी घटना है, जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस और आम नागरिक आमने-सामने आए हैं. इससे पहले गुरुवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में कश्मीरी नागरिकों में आजादी के नारे लगाए थे. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जनमत संग्रह हो जाए तो PoK पाकिस्तान का इलाका नहीं रहने वाला है.

- Advertisement -

साभार : एबीपी न्यूज

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।