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बीएलए ने बलूचिस्तान के जेहरी क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना के 15 सैनिकों को किया ढेर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

क्वेटा. बलूचिस्तान में सक्रिय विद्रोही गुट बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने पाकिस्तान आर्मी के 15 सैनिकों की हत्या की जिम्मेदारी ली है। बीएलए की ओर से शनिवार को जारी बयान में ये कहा गया है। बयान में कहा गया है कि बीएलए लड़ाकों ने खुजदार जिले के जेहरी इलाके में हुई झड़प में 15 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों को मारा है। बलूचिस्तान का जेहरी इलाका कथित तौर पर अगस्त के महीने से आजादी समर्थक सशस्त्र समूहों के कब्जे में है। पाकिस्तान की सेना इस पर नियंत्रण के लिए कोशिश कर रही है और इसके चलते उसकी बलूच लड़ाकों से झड़पें हो रही हैं।

द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएलए प्रवक्ता जीयंद बलूच ने कहा कि उनके लड़ाकों ने शुक्रवार को अंजीरा इलाके में दस सैन्य वाहनों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया। इस हमले में छह वाहनों को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि इस हमले में 15 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं।

जेहरी पर सशस्त्र नियंत्रण

बीएलए ने बताया है कि गजान, अंजीरा और आसपास के इलाकों में लड़ाई जारी है। उसके लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना की बढ़त को नाकाम कर दिया गया है।बयान में कहा गया है कि पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है। यह पूरे क्षेत्र में बीएलए और उसके सहयोगियों के लिए बड़ी कामयाबी है। जेहरी के आसपास झड़पें सशस्त्र समूहों के गठबंधन बलूच राजी आजोई संगर (BRAS) के जेहरी पर नियंत्रण की घोषणा के कुछ हफ्ते बाद हुई हैं। 11 अगस्त को BRAS के लड़ाकों ने 13 सैन्य वाहनों के एक काफिले पर घात लगाकर हमला किया। इसमें 37 सैनिक मारे गए थे और सेना के वाहन, हथियार जब्त कर लिए गए थे।

फेल हो रही पाक सेना

अगस्त की इस झड़प के बाद से पाकिस्तानी सेना ने इस क्षेत्र पर फिर से कब्जे के कई प्रयास किए हैं। इसमें पाक सेना को बार-बार घात लगाकर किए गए हमलों का सामना करना पड़ा है। इसके चलते पाक आर्मी के काफिलों को बार-बार पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इससे परेशान पाकिस्तानी सेना ने जेहरी के आसपास कई हवाई हमले किए हैं।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।