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त्याग और बलिदान – सिख गुरु परंपरा का गौरवमय इतिहास

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जालंधर। विद्या भारती पंजाब के संपर्क विभाग द्वारा प्रांत कार्यालय, जालंधर में “त्याग और बलिदान : सिक्ख गुरु परंपरा का गौरवमय इतिहास” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ शहीद शिरोमणि श्री गुरु तेग बहादुर जी एवं उनके संपूर्ण परिवार को श्रद्धासुमन अर्पित कर हुआ। मंच संचालन शिवम गुप्ता जी, प्रांत प्रचार संयोजक एवं प्रधानाचार्य, ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) जगदीश गगनेशा सर्वहितकारी विद्या मंदिर लाडोवाली ने किया।

मुख्य अतिथि जत्थेदार बाबा गुरदेव सिंह जी, मुखी बाबा फ़तेहसिंह तरना दल ने अपने उद्बोधन में श्री गुरु नानक देव जी द्वारा सिक्ख पंथ की स्थापना के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी गुरुओं के जीवन, उनके संघर्ष, शहादत एवं पारिवारिक बलिदानों का स्मरण कराया। उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में वर्णित श्लोकों के माध्यम से प्रकृति – जल, वायु, आकाश, पृथ्वी एवं अग्नि – की रक्षा का संदेश दिया तथा समाज को एकजुट होकर सामाजिक बुराइयों को दूर करने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता स. जसबीर सिंह जी ने सिक्ख गुरुओं के इतिहास, उनके त्याग, तपस्या, शौर्य एवं बलिदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने गुरु परंपरा द्वारा स्थापित मूल्यों को आत्मसात कर उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में राजेंद्र कुमार जी ने शहीदी सप्ताह के महत्व पर कहा कि इन दिनों में केवल उत्सव नहीं, बल्कि अपने धर्म, संस्कृति एवं साहिबजादों के महान बलिदानों को स्मरण करने की आवश्यकता है। ऐसे त्याग और बलिदान की गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाना हमारा कर्तव्य है।

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गोष्ठी में स. जसवीर सिंह जी, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

साभार : विश्व संवाद केंद्र

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।