लोड हो रहा है...

अधिसूचना सं. 44/2025-सीमा शुल्क (गै.टै.) खाद्य तेल, पीतल स्क्रैप, सुपारी, सोना और चांदी के लिए टैरिफ मूल्य के निर्धारण के संबंध में

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
1 Min Read

सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 14 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्‍त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड, इस बात से संतुष्ट होने पर कि ऐसा करना आवश्यक एवं समीचीन है, एतद्द्वारा, भारत सरकार, वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) की अधिसूचना सं. 36/2001-सीमा शुल्क (गै. टै.), दिनांक 3 अगस्त, 2001, जिसे का.आ. 748 (अ), दिनांक 3 अगस्त, 2001 के तहत भारत के राजपत्र, असाधारण के भाग-II, खंड-3, उपखंड (ii) में प्रकाशित किया गया था, में निम्नलिखित संशोधन करता है, अर्थात्:-

उक्त अधिसूचना में, सारणी-1, सारणी-2 और सारणी-3 के स्थान पर निम्नलिखित सारणियाँ प्रतिस्थापित की जाएँगी, अर्थात्:-

“सारणी-1

क्रम. सं.अध्याय/शीर्ष/उपशीर्ष/ टैरिफ मदमाल का विवरणटैरिफ मूल्य

(अमरीकी डालर प्रति मीट्रिक टन)

(1)(2)(3)(4)
11511 10 00कच्चा पॉम ऑयल1006
21511 90 10आर बी डी पॉम ऑयल1032
31511 90 90अन्य पॉम ऑयल1019
41511 10 00कच्चा पामोलिन1044
51511 90 20आर बी डी पामोलीन1047
61511 90 90अन्य पामोलीन1046
71507 10 00सोयाबीन का कच्चा तेल1095
87404 00 22पीतल स्क्रैप (सभी ग्रेड)5563

सारणी-2

- Advertisement -
क्रम. सं.अध्याय/शीर्ष/ उपशीर्ष/ टैरिफ मदमाल का विवरणटैरिफ मूल्य

(अमरीकी डालर)

(1)(2)(3)(4)
171 या 98स्वर्ण, किसी भी रूप में, जिसके सम्बन्ध में अधिसूचना संख्या 50/2017-सीमा शुल्क, दिनांक 30.06.2017 की प्रविष्टि संख्या 356 के अंतर्गत लाभ प्राप्त किया गया हो

 

 

1054 प्रति 10 ग्राम

271 या 98रजत, किसी भी रूप में, जिसके सम्बन्ध में अधिसूचना संख्या 50/2017-सीमा शुल्क, दिनांक 30.06.2017 की प्रविष्टि संख्या 357 के अंतर्गत लाभ प्राप्त किया गया हो 

1164  प्रति किलोग्राम

 

 

 

 

 

3

 

 

 

 

 

71

(i) रजत, पदकीय या रजत सिक्कों से भिन्न किसी भी रूप में, जिसकी रजत अंतर्वस्तु 99.9 प्रतिशत से कम नहीं है या उपशीर्ष 7106 92 के अधीन आने वाले रजत के अर्ध विनिर्मित प्ररूप;

 

(ii) पदकीय या रजत सिक्के, जिसकी रजत अंतर्वस्तु 99.9 प्रतिशत से कम नहीं है या डाक, कुरियर या सामान के माध्यम से ऐसे माल के आयात से भिन्न उपशीर्ष 7106 92 के अधीन आने वाले रजत के अर्ध विनिर्मित प्ररूप।

 

स्पष्टीकरण – इस प्रविष्टि के प्रयोजनों के लिए, किसी भी प्ररूप में रजत के अंतर्गत विदेशी मुद्रा के सिक्के, रजत से बने आभूषण या रजत से बनी वस्तुएं नहीं हैं।

 

 

 

 

 

1164 प्रति किलोग्राम

 

 

 

 

 

4

 

 

 

 

 

71

(i) स्वर्ण बार, तोला बार से भिन्न, जिस पर विनिर्माणकर्ता या रियाइनर का खुदा हुआ क्रम संख्यांक और मिट्रिक यूनिटों में भार अभिव्यक्त है;

 

(ii) स्वर्ण सिक्के, जिसमें 99.5 प्रतिशत से अन्यून स्वर्ण है, और स्वर्ण प्राप्तियां, डाक, कुरियर या बैगेज के माध्यम से ऐसे माल के आयात से भिन्न।

 

स्पष्टीकरण – इस प्रविष्टि के प्रयोजन के लिए, “स्वर्ण प्राप्तियां” से कोई छोटा संघटक, जैसे हुक, क्लास्प, क्लैंप, पिन, कैच, स्क्रू बैक, जिसका उपयोग पूर्ण आभूषण या उसके किसी भाग को स्थान में जोड़े रखने के लिए किया जाता है, अभिप्रेत है।

 

 

 

 

1054 प्रति 10 ग्राम

सारणी-3

क्रम. सं.अध्याय/शीर्ष/ उपशीर्ष/ टैरिफ मदमाल का विवरणटैरिफ मूल्य

(अमरीकी डालर प्रति मीट्रिक टन)

(1)(2)(3)(4)
1080280सुपारी6970 (अर्थात कोई परिवर्तन नहीं)”

यह अधिसूचना   01 जुलाई, 2025 से प्रभावी होगी I

नोट:- मूल अधिसूचना भारत के राजपत्र, असाधारण के भाग-II, खंड-3, उपखंड (ii) में अधिसूचना सं. 36/2001- सीमा शुल्क (गै.टै.), दिनांक 3 अगस्त, 2001, का.आ. 748 (अ), दिनांक 3 अगस्त, 2001 के तहत प्रकाशित की गई थी, तथा यह अंतिम बार अधिसूचना सं. 43/2025-सीमाशुल्क (गै.टै.), दिनांक 13 जून 2025, जिसे का.आ. 2632 (अ) दिनांक 13 जून 2025 के तहत भारत के राजपत्र, असाधारण के भाग-II, खंड-3, उपखंड (ii) में ई-प्रकाशित किया गया था, के द्वारा संशोधित की गई थीI

- Advertisement -

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।