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विशाल मिश्रा और अंशुल गर्ग की जोड़ी ने फिल्म ‘एक दीवाने की दीवानियत’ के टाइटल ट्रैक से इंटरनेट पर धूम मचाई

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, अगस्त 2025: फिल्म ‘एक दीवाने की दीवानियत’ का टाइटल ट्रैक ‘दीवानियत’, जिसे विशाल मिश्रा ने गाया है, इंटरनेट पर काफी लोकप्रिय हो गया है। हर्षवर्धन राणे और सोनम बाजवा अभिनीत इस फिल्म का टीज़र हाल ही में रिलीज़ हुआ था, जिसने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।

यह गाना म्यूजिक लेबल प्ले डीएमएफ के संस्थापक अंशुल गर्ग का बतौर निर्माता पहला फिल्मी गीत है। उन्होंने पहले भी कई हिट गाने दिए हैं। ‘दीवानियत’ गाने से पहले, विशाल मिश्रा और अंशुल गर्ग की जोड़ी ने ‘मांझा’ जैसे सफल गाने दिए हैं। गाने के पूरी तरह से रिलीज़ होने से पहले ही, यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और इसके कई फैन एडिट्स बन रहे हैं।

इस गाने को मिली ज़बरदस्त प्रतिक्रिया पर अंशुल गर्ग कहते हैं, “दीवानियत मेरे लिए बहुत खास है, क्योंकि यह बतौर फिल्म निर्माता मेरा पहला गाना है। रिलीज़ से पहले ही जो प्यार मिला है, वो बेहद खास है। दर्शकों का यह उत्साह दिखाता है कि कहानी को कहने में संगीत कितना महत्वपूर्ण है। मुझे यकीन है कि जब दर्शक पूरा गाना सुनेंगे तो इसे और भी पसंद करेंगे।”

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विशाल मिश्रा भी अंशुल से सहमत हैं। वे कहते हैं, “मैंने बहुत सारे फिल्मी गाने गाए हैं, लेकिन बहुत कम गानों को रिलीज़ से पहले इतना प्यार मिला है। ‘दीवानियत’ को मिला प्यार ही सब कुछ कह देता है। अब मैं दर्शकों के पूरे गाने को सुनने और उनकी प्रतिक्रिया जानने का इंतज़ार कर रहा हूँ।”

मिलाप मिलन ज़वेरी द्वारा निर्देशित और राघव शर्मा के सह-निर्माण में बनी ‘एक दीवाने की दीवानियत’ एक गहरी प्रेम कहानी है। यह फिल्म इस दिवाली पर सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।