लोड हो रहा है...

एससीओ समिट में तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाने की पहल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (31 अगस्त, 2025) को SCO समिट में हिस्सा लिया, जहां कई देश के प्रमुख मौजूद थे, लेकिन इस समिट में कुछ ऐसा हुआ, जिसे देख दुनिया हैरान रह गई. दरअसल SCO के मंच पर तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने पीएम मोदी से हाथ मिलाने की पहल की, जिसका पीएम मोदी ने स्वागत किया, जो भारत की शक्ति को दर्शाता है. पाकिस्तान के साथ भाईचारा का रिश्ता निभाने वाला तुर्की, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को ड्रोन और मिसाइल की सप्लाई की, आज भारत के साथ हाथ मिलाने के लिए बेताब हो रहा है. अब इस मंच की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं.

भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने को बेताब तुर्की

इन तस्वीरों को देखकर ये अनुमान लगाया जा रहा है कि तुर्की की भारत के साथ हाथ मिलाने की बेताबी ये बता रही है कि तुर्की, भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने के लिए अपनी पहल कर रहा है, लेकिन भारत उन देशों को माफ करने वाला नहीं है, जिसने उसके खिलाफ जाकर पाकिस्तान का साथ दिया. हालांकि मंच पर हाथ मिलाने के बाद पीएम मोदी ने तुर्की के राष्ट्रपति की तरफ देखा भी नहीं और आगे बढ़ गए. चूंकि SCO मंच पर भारत मौजूद था, इसलिए नियमों के अनुसार, तुर्की के साथ हाथ मिलाने की पहल का स्वागत करते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया.

चीनी राष्ट्रपति से आतंकवाद को लेकर बातचीत

भारत ने SCO समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात के दौरान ये साफ कहा है कि आतंकवाद से लड़ने के लिए भारत को चीन का साथ चाहिए. भारत का सीधा निशाना चीन के दोस्त पाकिस्तान की ओर था. SCO समिट मंच पर आने से पहले पीएम मोदी ने शी जिनपिंग के साथ 50 मिनट तक बातचीत की. बातचीत के बाद मोदी ने जिनपिंग को भारत में आयोजित ब्रिक्स 2026 में आने के लिए न्योता दिया. इससे पहले उन्होंने जिनपिंग के सामने आतंकवाद का मुद्दा उठाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोदी ने इसे वैश्विक मुद्दा बताया और साथ देने की मांग की.

साभार : एबीपी न्यूज  

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।