ढाका. भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश दिया है। अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने न केवल वर्तमान सरकार के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की, बल्कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (BNP) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की।
लोकतांत्रिक मूल्यों और पुराने संबंधों का सम्मान
जयशंकर की यह पहल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में भारत के संतुलन बनाने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है। उन्होंने खालिदा जिया के स्वास्थ्य के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं और बांग्लादेश के विकास में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया।
“भारत, बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को केवल एक दल या सरकार तक सीमित नहीं रखता, बल्कि यह दोनों देशों के लोगों और उनके साझा लोकतांत्रिक इतिहास के बीच का अटूट बंधन है।” — विदेश मंत्रालय के सूत्रों से प्राप्त संदेश का सारांश
बैठक के मुख्य बिंदु
समावेशी कूटनीति: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत बांग्लादेश के सभी राजनीतिक हितधारकों के साथ संवाद बनाए रखने में विश्वास रखता है।
खालिदा जिया को सम्मान: आधिकारिक स्तर पर खालिदा जिया के प्रति सम्मान व्यक्त करना, विपक्षी खेमे में भारत की छवि को सकारात्मक बनाने की एक कोशिश मानी जा रही है।
क्षेत्रीय स्थिरता: वार्ता के दौरान तीस्ता जल बंटवारे, सीमा सुरक्षा और कनेक्टिविटी जैसे पुराने मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर का यह कदम ढाका में सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक अस्थिरता के बाद भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का हिस्सा है। खालिदा जिया को श्रद्धांजलि और सम्मान देना बीएनपी समर्थकों के बीच भारत के प्रति जमी हुई बर्फ को पिघलाने का काम कर सकता है।
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