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एस. जयशंकर का ढाका दौरा: कूटनीति के साथ खालिदा जिया को दी गई विशेष श्रद्धांजलि

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

ढाका. भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश दिया है। अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने न केवल वर्तमान सरकार के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की, बल्कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (BNP) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की।

लोकतांत्रिक मूल्यों और पुराने संबंधों का सम्मान

जयशंकर की यह पहल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में भारत के संतुलन बनाने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है। उन्होंने खालिदा जिया के स्वास्थ्य के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं और बांग्लादेश के विकास में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया।

“भारत, बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को केवल एक दल या सरकार तक सीमित नहीं रखता, बल्कि यह दोनों देशों के लोगों और उनके साझा लोकतांत्रिक इतिहास के बीच का अटूट बंधन है।” — विदेश मंत्रालय के सूत्रों से प्राप्त संदेश का सारांश

बैठक के मुख्य बिंदु

समावेशी कूटनीति: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत बांग्लादेश के सभी राजनीतिक हितधारकों के साथ संवाद बनाए रखने में विश्वास रखता है।

खालिदा जिया को सम्मान: आधिकारिक स्तर पर खालिदा जिया के प्रति सम्मान व्यक्त करना, विपक्षी खेमे में भारत की छवि को सकारात्मक बनाने की एक कोशिश मानी जा रही है।

क्षेत्रीय स्थिरता: वार्ता के दौरान तीस्ता जल बंटवारे, सीमा सुरक्षा और कनेक्टिविटी जैसे पुराने मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर का यह कदम ढाका में सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक अस्थिरता के बाद भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का हिस्सा है। खालिदा जिया को श्रद्धांजलि और सम्मान देना बीएनपी समर्थकों के बीच भारत के प्रति जमी हुई बर्फ को पिघलाने का काम कर सकता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।