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प्रकाश राज की माँ स्वर्णलता का निधन: बेंगलुरु में ईसाई रीति-रिवाजों से हुआ अंतिम संस्कार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

बेंगलुरु | 1 अप्रैल, 2026

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और बहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रकाश राज (Prakash Raj) पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी माता, स्वर्णलता, का बेंगलुरु में निधन हो गया। वह 86 वर्ष की थीं। पिछले कुछ समय से वह बढ़ती उम्र से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं।

ईसाई रीति-रिवाजों के साथ हुआ अंतिम संस्कार

स्वर्णलता का अंतिम संस्कार बेंगलुरु के होसुर रोड स्थित अडुगोडी क्रिश्चियन कब्रिस्तान (Adugodi Christian Cemetery) में पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था, जहाँ परिवार के सदस्यों, करीबी रिश्तेदारों और फिल्म जगत की कुछ चुनिंदा हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

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सेंट माइकल चर्च में प्रार्थना सभा

अंतिम संस्कार से पूर्व, शांति नगर स्थित सेंट माइकल चर्च (St Michael Church) में एक विशेष प्रार्थना सभा (Requiem Mass) का आयोजन किया गया। प्रकाश राज को चर्च में अपनी माँ की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए देखा गया। वह अपनी माँ के बेहद करीब थे और अक्सर साक्षात्कारों में उनके संघर्षों और परवरिश का जिक्र करते रहे हैं।

एक नजर: स्वर्णलता का जीवन और परिवार

  • पृष्ठभूमि: स्वर्णलता का जन्म कर्नाटक के एक मध्यमवर्गीय ईसाई परिवार में हुआ था।

  • धार्मिक आस्था: इसाई धर्म में उनकी गहरी आस्था थी, यही कारण है कि उनकी अंतिम विदाई उनकी आस्था के अनुरूप ईसाई रीति-रिवाजों से की गई।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।