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शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1,187 अंक फिसला, रुपया टूटकर ₹96.315 के निचले स्तर पर पहुँचा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

 मुंबई ।

भारतीय शेयर बाजार में 1 अक्टूबर 2026 का दिन निवेशकों के लिए भारी उथल-पुथल भरा रहा। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) में करीब 1,187 अंकों की भीषण गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, दिन के दूसरे हिस्से में निचले स्तरों से कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन अंततः सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बड़े नुकसान के साथ लाल निशान में बंद हुए।

दूसरी ओर, विदेशी मुद्रा बाजार में भी भारतीय मुद्रा (INR) पर चौतरफा दबाव देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर ₹96.315 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो लगभग दो महीने का सबसे निचला स्तर है।

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               1 अक्टूबर 2026: बाजार का संक्षिप्त ब्योरा

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 सूचकांक / करेंसी      निचला स्तर (Intraday)   बंद भाव (Closing)    बदलाव

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 BSE Sensex            71,292.88               71,909.70          -570.59 (-0.79%)

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 NSE Nifty 50          22,217.30               22,421.95          -198.50 (-0.88%)

 USD / INR             —                      ₹96.3150           -0.5% (कमजोरी)

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सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार चौथे दिन कमजोरी

कारोबारी सत्र के दौरान बीएसई सेंसेक्स 1,187 अंक गिरकर 71,292.88 के निचले स्तर पर पहुंच गया था। बाद में कुछ खरीदारी लौटने से यह 570.59 अंक (0.79%) की गिरावट के साथ 71,909.70 पर बंद हुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी पूरे दिन दबाव में रहा। निफ्टी ने 22,217.30 का निचला स्तर छुआ और अंत में 198.50 अंक (0.88%) टूटकर 22,421.95 के स्तर पर बंद हुआ। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र था जब भारतीय बाजारों में मंदी का रुख देखने को मिला।

 

किन कारणों से टूटा बाजार?

  1. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली: विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार से लगातार पूंजी की निकासी ने नकदी प्रवाह पर भारी दबाव बना दिया है।
  2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर: अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में लगातार बढ़ोतरी से निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों से पैसा निकालकर सुरक्षित डॉलर-आधारित इंस्ट्रूमेंट्स में लगा रहे हैं।
  3. कच्चे तेल (Brent Crude) की चाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच रहा है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे व्यापार घाटे (Trade Deficit) और महंगाई पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
  4. सेक्टर–वार बिकवाली: ऑटो, मेटल और रियल्टी इंडेक्स में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, आईटी (IT) शेयरों में देखी गई तेजी ने सूचकांक को और अधिक फिसलने से बचाया।

 

डॉलर के मुकाबले रुपया ₹96.315 पर

शेयर बाजार में गिरावट के साथ-साथ भारतीय रुपये में भी करीब 0.5% की कमजोरी दर्ज की गई। रुपया ₹96.3150 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। हालांकि, सरकारी बैंकों द्वारा की गई डॉलर बिक्री (Central Bank Intervention) ने रुपये की गिरावट को एक सीमा में बांधने का प्रयास किया।

 

संबंधित मीडिया लिंक्स (Related Links)

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQ)

Q1: 1 अक्टूबर 2026 को सेंसेक्स और निफ्टी कितने अंक गिरकर बंद हुए?

उत्तर: 1 अक्टूबर 2026 को सेंसेक्स 570.59 अंक (0.79%) गिरकर 71,909.70 पर और निफ्टी 50 करीब 198.50 अंक (0.88%) गिरकर 22,421.95 पर बंद हुआ।

Q2: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सबसे मुख्य कारण क्या है?

उत्तर: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, डॉलर इंडेक्स की मजबूती और कच्चे तेल (Brent Crude) का $100 के पास पहुंचना इसके मुख्य कारण हैं।

Q3: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया किस स्तर पर आ गया है?

उत्तर: डॉलर के मुकाबले रुपया 0.5% कमजोर होकर ₹96.3150 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो कि करीब 2 महीने का निचला स्तर है।

 

निवेश संबंधी डिस्क्लेमर (Disclaimer)

शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और विदेशी मुद्रा (Forex) में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। इस लेख/समाचार में दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्य और बाजार घटनाक्रम की रिपोर्टिंग के लिए है। इसे किसी भी शेयर, सूचकांक या अन्य वित्तीय साधनों को खरीदने या बेचने की निवेश सलाह न माना जाए। कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार (SEBI Registered Advisor) से परामर्श अवश्य लें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।