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ईरान में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक: सरकारी पाबंदियों के बीच जश्न और असंतोष की गूँज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

तेहरान. ईरान के हालिया घटनाक्रम ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ जहां ईरानी सरकार ने आधिकारिक तौर पर 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है और देश के धार्मिक स्थलों पर सन्नाटा और प्रार्थनाओं का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो एक अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। राजधानी तेहरान सहित कई प्रमुख शहरों में युवाओं और असंतुष्ट समूहों द्वारा ‘जश्न’ मनाने की खबरें सामने आई हैं।

शोक और शक्ति प्रदर्शन: सरकार का रुख

ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, प्रशासन ने इस दुख की घड़ी में देश को एकजुट रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी है।

  • सुरक्षा बलों की तैनाती: संवेदनशील इलाकों में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और पुलिस बल की भारी मौजूदगी देखी जा रही है।

  • इंटरनेट पर पाबंदी: अफवाहों और विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर आंशिक प्रतिबंध लगा दिया गया है।

  • धार्मिक सभाएं: मशहद और कोम जैसे पवित्र शहरों में बड़ी संख्या में लोग शोक सभाओं में हिस्सा ले रहे हैं, जिसे सरकार के प्रति जनसमर्थन के तौर पर पेश किया जा रहा है।

सड़कों पर आतिशबाजी: क्या यह केवल जश्न है या विद्रोह?

सोशल मीडिया पर ‘X’ और ‘Telegram’ जैसे माध्यमों से साझा किए गए वीडियो में युवाओं के समूहों को रात के अंधेरे में पटाखे फोड़ते और नारेबाजी करते देखा गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह जश्न किसी व्यक्तिगत क्षति पर नहीं, बल्कि मौजूदा व्यवस्था (Establishment) के प्रति लंबे समय से दबे हुए गुस्से का प्रतीक है।

असंतोष के 3 प्रमुख कारण:

  1. आर्थिक मंदी और महंगाई: अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान की मुद्रा (Rial) अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर है। आम जनता के लिए बुनियादी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

  2. सामाजिक स्वतंत्रता का अभाव: 2022 में ‘महसा अमीनी’ की मौत के बाद भड़के विरोध प्रदर्शनों ने देश में गहरी दरार पैदा कर दी थी। महिलाएं और युवा वर्ग सख्त सामाजिक नियमों से आजादी चाहते हैं।

  3. बदलाव की उम्मीद: युवाओं का एक बड़ा वर्ग इस घटना को सत्ता के पुनर्गठन या भविष्य में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की संभावना के रूप में देख रहा है।

क्या भविष्य बदलेगा?

मध्य पूर्व (Middle East) के मामलों के जानकारों का मानना है कि ईरान इस समय ‘दो विचारधाराओं के संघर्ष’ से गुजर रहा है। एक तरफ वह वर्ग है जो इस्लामी क्रांति के मूल्यों को बनाए रखना चाहता है, और दूसरी तरफ वह युवा पीढ़ी है जो वैश्विक दुनिया के साथ जुड़ना चाहती है।

अनिश्चितता के साये में ईरान

फिलहाल ईरान की स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। 40 दिनों का यह शोक काल प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा है, क्योंकि उसे न केवल बाहरी चुनौतियों का सामना करना है, बल्कि घर के भीतर उठ रहे विरोध के सुरों को भी शांत करना है।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।