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यात्रा में सफलता के अचूक ज्योतिषीय नियम और शुभ मुहूर्त

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

यात्रा में भरपूर सफलता पाने के लिये आपको प्राचीनकाल के ज्योतिषियों, संतों और ऋषियों के बनाये हुये नियमों का सहारा लेना चाहिये जिनके अनुभव से इस बारे में अचूक सिद्धान्तों की रचना हुई है। आपकी जन्मकुण्डली में यदि ऐसे योग मौजूद है जिनके प्रभाव से यात्रा के द्वारा ही आपकी उन्नति होनी है तो सभी समय आपके शुभ मुहूर्त है। यात्रा करते समय चौघड़िया मुहूर्त देख लेना चाहिये, नियम यह है कि जो सांस चल रही है वही पैर यात्रा के लिये पहले आगे बढ़ाना चाहिये। “जेहि सुर चले, वही पग दीजै। काहे को पोथी पत्रा लीजै।।” यात्रा के समय जिन चीजों को देखना शुभ माना गया है- पुष्प, दर्पण, पक्षी, मछली, बछड़े के साथ गाय, तिलकधारी ब्राम्हण, जल भरा घड़ा, फल, दही, नीलकंठ, धोबी, शव, ईख, शराब, पान, दूध, घी, शहद, हाथी, घोड़ा, ध्वज, कन्या, रत्न, गुरु, राजा, कुश, हंस, मोर, बकरी, वाद्य यंत्र।

यात्रा के समय चन्द्रमा का विचार करने से लाभ होता है। सम्मुख चन्द्रमा और दाहिने चन्द्रमा लाभदायक होता है। बायें और पीछे चन्द्रमा हानि देता है। यात्रा के समय राहुकाल का विचार भी किया जाना चाहिए। राहु का वास सम्मुख दिशा में होने पर यात्रा नहीं करनी चाहिए। राहु का वास रविवार को उत्तर में, सोमवार को वायव्य में, मंगलवार को पश्चिम में, बुधवार को नैऋत्य कोण में, गुरूवार को दक्षिण में, शुक्रवार को अग्निकोण, शनिवार को पूर्व दिशा में होता है।

यात्रा के समय योगिनी वास का विचार भी करना चाहिये। योगिनी के बायें और पीठ की ओर होने पर मनोकामना पूरी करती है। दाहिने और सामने होने पर दुख पहुँचाती और कष्ट देती है। योगिनी वास प्रतिपदा को पूर्व दिशा में, द्वितीया को उत्तर में, तृतीया को आग्नेय, चतुर्थी को नैऋत्य, पंचमी को दक्षिण, षष्ठी को पश्चिम, सप्तमी को वायव्य, अष्टमी को ईशान में होता है, नवमी से दिशा का सिलसिला इसी प्रकार दोहराया जाता है।

रविवार को पान खाकर, सोमवार को दर्पण देखकर, मंगलवार को गुड़ खाकर, बुध को धनिया खाकर, बृहस्पतिवार को जीरा खाकर, शुक्रवार को दही खाकर और शनिवार को अदरक खाकर यात्रा करने से कई प्रकार के दोषों का निराकरण हो जाता है। दिन व रात की चौघड़िया के समान ८ भाग करके चर, लाभ, अमृत और शुभ को उपयोग करना चाहिए।

दिन का चौघड़िया (सूर्योदय से सूर्यास्त तक)

वार१२३४५६७८
रविउद्वेगचरलाभअमृतकालशुभरोगउद्वेग
सोमअमृतकालशुभरोगउद्वेगचरलाभअमृत
मंगलरोगउद्वेगचरलाभअमृतकालशुभरोग
बुधलाभअमृतकालशुभरोगउद्वेगचरलाभ
गुरुशुभरोगउद्वेगचरलाभअमृतकालशुभ
शुक्रचरलाभअमृतकालशुभरोगउद्वेगचर
शनिकालशुभरोगउद्वेगचरलाभअमृतकाल

रात की चौघड़िया (सूर्यास्त से सूर्योदय तक)

वार१२३४५६७८
रविशुभअमृतचररोगकाललाभउद्वेगशुभ
सोमचररोगकाललाभउद्वेगशुभअमृतचर
मंगलकाललाभउद्वेगशुभअमृतचररोगकाल
बुधउद्वेगशुभअमृतचररोगकाललाभउद्वेग
गुरुअमृतचररोगकाललाभउद्वेगशुभअमृत
शुक्ररोगकाललाभउद्वेगशुभअमृतचररोग
शनिलाभउद्वेगशुभअमृतचररोगकाललाभ

अधिक जानकारी के लिए आप ज्योतिषाचार्य श्याम जी शुक्ल (मो. : 8808797111) से संपर्क कर सकते हैं.

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।