लोड हो रहा है...

बिहार के सरकारी अस्पतालों में अब आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं भी मिलेंगी मुफ्त, सरकार का बड़ा फैसला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

पटना. बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी निर्णय लिया है। अब प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अंग्रेजी (एलोपैथिक) दवाओं के साथ-साथ आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं भी मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी।

अस्पताल परिसर में ही मिलेगा इलाज और दवा

स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले से उन हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी जो पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में विश्वास रखते हैं। राज्य सरकार ने पहले ही विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक डॉक्टरों की नियुक्ति कर दी थी, लेकिन दवाओं की कमी के कारण मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर पर निर्भर रहना पड़ता था। अब डॉक्टरों के परामर्श के साथ-साथ दवाएं भी अस्पताल के अंदर ही मिलेंगी।

प्रमुख विशेषताएं और कार्यान्वयन

  • आपूर्ति की जिम्मेदारी: दवाओं की नियमित खरीद, बेहतर भंडारण और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने का जिम्मा बिहार स्वास्थ्य सेवाएं आधारभूत संरचना निगम (BMSICL) को सौंपा गया है।

  • आयुष्मान आरोग्य मंदिर: समाचार सूत्रों के अनुसार, राज्य के 294 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में भी इन दवाओं का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।

  • चरणबद्ध विकास: यह सुविधा राज्य के सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है ताकि वितरण प्रणाली में कोई बाधा न आए।

“बड़ी संख्या में मरीज वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को प्राथमिकता देते हैं। उनकी मांग और स्थानीय जरूरतों को देखते हुए सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं की विविधता बढ़ाने का यह निर्णय लिया है।” — विभागीय अधिकारी

ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा मिलने से न केवल मरीजों की जेब पर बोझ कम होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही ‘समग्र स्वास्थ्य’ (Holistic Health) की अवधारणा साकार हो सकेगी।

matribhumisamachar.com/

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।