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बी०एन०एस०डी० शिक्षा निकेतन कानपुर में ‘युवा संसद’ (उद्घोष-2026) का भव्य आयोजन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

 कानपुर|

कानपुर के प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान बी०एन०एस०डी० शिक्षा निकेतन इण्टर कॉलेज, बेनाझाबर में विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय कार्यप्रणाली, तार्किक चिंतन और अभिव्यक्ति-कौशल को विकसित करने के उद्देश्य से ‘उद्घोष-2026′ के अंतर्गत युवा संसद (Youth Parliament) का सफल आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की व्यावहारिक कार्यप्रणाली से परिचित कराना था। इसके माध्यम से छात्रों को राष्ट्रीय महत्व के ज्वलंत विषयों पर तथ्यपरक एवं तार्किक ढंग से अपने विचार प्रस्तुत करने का एक सशक्त मंच प्राप्त हुआ।

 

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दीप प्रज्वलन एवं कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि डा. राम तिवारी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक मनोज कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि का परिचय प्रस्तुत किया और उनका ससम्मान स्वागत किया।

 

 

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चर्चा का मुख्य विषय: प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में सुधार

युवा संसद के दौरान निर्धारित मुख्य विषय था:

“Discussion on Reforming India’s Competitive Examination System with Special Reference to Examination Irregularities, Student Welfare, and Equal Access to Higher Education”

(परीक्षा अनियमितताओं, विद्यार्थी कल्याण एवं उच्च शिक्षा तक समान पहुँच के विशेष संदर्भ में भारत की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में सुधार)

 

विद्यार्थियों ने संसदीय मर्यादा का पालन करते हुए पक्ष एवं विपक्ष के रूप में इस विषय के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से अपने विचार रखे:

  1. परीक्षा में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व: छात्रों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं (Paper Leaks/Irregularities) को रोकने के लिए सख्त प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों की आवश्यकता बताई। परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने पर विशेष बल दिया गया।
  2. विद्यार्थी कल्याण एवं मानसिक स्वास्थ्य: परीक्षा के दौरान छात्रों पर बनने वाले मानसिक दबाव को कम करने हेतु परामर्श व्यवस्था, पारदर्शी सूचना-प्रणाली और समयबद्ध शिकायत-निवारण (Grievance Redressal) व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई।
  3. उच्च शिक्षा तक समान पहुँच: आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक विषमताओं के बावजूद योग्य विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करने हेतु छात्रवृत्ति, गुणवत्तापूर्ण डिजिटल संसाधन और पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

 

लोकतांत्रिक नागरिकता एवं संवाद–कौशल का विकास

संसदीय शैली में प्रश्नों को उठाने, तार्किक उत्तर देने और भिन्न दृष्टिकोणों का सम्मान करने से विद्यार्थियों में अनुशासन, संवाद-कौशल एवं नेतृत्व क्षमता का विकास देखा गया।

विद्यालय प्रशासन ने इस अवसर पर कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि तथ्यों के आधार पर विचार करना, प्रश्न पूछना और सार्वजनिक विषयों पर जिम्मेदारी से संवाद करना भी एक जागरूक नागरिक के कर्तव्य हैं।

 

उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु पुरस्कार वितरण

कार्यक्रम के समापन सत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि डा. अनूप कुमार सिंह द्वारा पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। उन्होंने विजेता छात्रों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें अध्ययन के साथ-साथ लोकतांत्रिक मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इस अवसर पर डा. ए० के० सिंह, कार्तिक जी, विद्यालय के प्रधानाचार्य बृजमोहन कुमार सिंह, उप-प्रधानाचार्या मंजूबाला श्रीवास्तव, समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

 

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: BNSD शिक्षा निकेतन कानपुर में युवा संसद का आयोजन किस अंतर्गत किया गया?

उत्तर: इस कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय के वार्षिक/शैक्षणिक अभियान ‘उद्घोष-2026’ (Udghosh-2026) के अंतर्गत किया गया।

Q2: युवा संसद 2026 में चर्चा का मुख्य विषय क्या था?

उत्तर: परिचर्चा का मुख्य विषय “भारत की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में सुधार: परीक्षा अनियमितता, छात्र कल्याण और उच्च शिक्षा तक समान पहुँच” था।

Q3: इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कौन थे?

उत्तर: कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डा. राम तिवारी द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ तथा पुरस्कार वितरण मुख्य अतिथि डा. अनूप कुमार सिंह द्वारा किया गया।

 

⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख विद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस सूचना एवं घटनाक्रम के आधार पर जन–जागरूकता एवं शैक्षणिक समाचार के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।