नई दिल्ली । गुरुवार, 3 सितंबर 2026
देश के सबसे बड़े शेयर बाजार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) को लेकर कानूनी मोर्चे पर सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिली है। मार्केट रेगुलेटर SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) द्वारा ₹1,491.21 करोड़ के सेटलमेंट प्रपोजल को मंजूरी देने और सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं के वापस/खारिज होने से इस मेगा IPO के सामने खड़ी कई सालों पुरानी कानूनी अड़चनें पूरी तरह समाप्त हो गई हैं।
इस फैसले के बाद अब भारतीय पूंजी बाजार में इतिहास के सबसे बड़े IPO में से एक को पेश करने की तैयारी अंतिम चरण में है।
क्या है पूरा विवाद? (Co-location and Dark Fibre Case)
NSE का IPO पिछले लगभग एक दशक से लंबित था। विवाद का मुख्य कारण वर्ष 2015 में सामने आया को-लोकेशन (Co-location) और डार्क फाइबर (Dark Fibre) मामला था:
-
को-लोकेशन सुविधा: इस व्यवस्था के तहत ब्रोकरों को NSE के डेटा सेंटर में ही अपने सर्वर रखने की अनुमति मिलती थी। आरोप था कि कुछ चुनिंदा ब्रोकरों को डेटा तक तेजी से और तरजीही पहुंच (Preferential Access) दी गई, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिला।
-
डार्क फाइबर नेटवर्क: इसमें कुछ चुनिंदा ट्रेडिंग मेंबर्स को कम लेटेंसी वाली फाइबर केबल कनेक्टिविटी दी गई।
SEBI द्वारा पहले NSE पर भारी जुर्माना और फंड जब्त करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, बाद में सिक्योरिटीज एपेलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने इन आदेशों में बड़ी राहत दी, जिसके खिलाफ SEBI सुप्रीम कोर्ट गया था। अब दोनों पक्षों के बीच ₹1,491.21 करोड़ के समझौते पर सहमति बनने से यह विवाद समाप्त हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट और SEBI के इस फैसले के मायने
-
नियामकीय स्पष्टता: कानूनी अनिश्चितता समाप्त होने से NSE के संचालन और बोर्ड गवर्नेंस पर बना अनिश्चितता का बादल छंट गया है।
-
इश्यू का संभावित आकार: NSE पहले ही ड्रॉफ्ट रेड हरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। अनुमानित रूप से मौजूदा शेयरधारक ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए करीब 14.89 करोड़ शेयर बाजार में पेश करेंगे, जिसका साइज ₹30,000 करोड़ से अधिक हो सकता है।
-
अनलिस्टेड मार्केट में उछाल: इस खबर के आते ही असंगठित (Grey Market) बाजार में NSE के अनलिस्टेड शेयरों की मांग और मूल्यांकन में तेजी देखी जा रही है।
आगे की प्रक्रिया और संभावित समय सीमा
-
SEBI से NOC/अंतिम मंजूरी: केस वापस लिए जाने के बाद SEBI औपचारिक रूप से अंतिम नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करेगा।
-
RHP फाइलिंग और तिथियों का ऐलान: मर्चेंट बैंकरों की सलाह पर NSE अपना रेड हरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) फाइल करेगा, जिसमें प्राइस बैंड और इश्यू खुलने व बंद होने की तारीखें तय की जाएंगी।
सवाल-जवाब (Frequently Asked Questions – FAQ)
प्रश्न 1: NSE का IPO कब तक आ सकता है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट और SEBI से कानूनी सेटलमेंट पूरा होने के बाद, नियामकीय मंजूरी मिलते ही अगले कुछ हफ्तों में RHP फाइल किया जा सकता है।
प्रश्न 2: NSE का IPO फ्रेश इश्यू होगा या ऑफर फॉर सेल (OFS)?
उत्तर: यह मुख्य रूप से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, जिसमें कंपनी के मौजूदा निवेशक और संस्थागत शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।
प्रश्न 3: को-लोकेशन मामला क्या था और इसका क्या सेटलमेंट हुआ?
उत्तर: को-लोकेशन मामला सर्वर तक तरजीही पहुंच देने से जुड़ा था। NSE ने इस मामले को SEBI के साथ ₹1,491.21 करोड़ का भुगतान/सेटलमेंट करके बंद किया है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी शेयर बाजार की निवेश सलाह या किसी IPO को सब्सक्राइब करने की सिफारिश नहीं है। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है, निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
Matribhumisamachar


