लखनऊ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में खेलों के प्रति भारत की बढ़ती आकांक्षाओं को एक नई उड़ान दी। वाराणसी में 72वें राष्ट्रीय वॉलीबॉल टूर्नामेंट का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने देश को खेल महाशक्ति बनाने का संकल्प दोहराया।
खेल बुनियादी ढांचे पर जोर
टूर्नामेंट का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत अब केवल खेलों में भाग लेने वाला देश नहीं, बल्कि विश्व स्तरीय खेल आयोजनों का केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने वाराणसी के आधुनिक खेल परिसर की सराहना की और युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रोत्साहित किया।
ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स पर बड़ी घोषणा
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने दो प्रमुख लक्ष्यों पर मुहर लगाई:
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2030 कॉमनवेल्थ गेम्स: भारत इस आयोजन की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी को मजबूती से पेश कर रहा है।
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2036 ओलंपिक खेल: पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी की बोली जीतने के लिए “पूरी ताकत” से प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा, “140 करोड़ भारतीयों का सपना है कि ओलंपिक की मशाल भारत की धरती पर प्रज्वलित हो। हम इसके लिए बुनियादी ढांचे और एथलीटों की तैयारी पर निवेश कर रहे हैं।”
खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन
प्रधानमंत्री ने वॉलीबॉल टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे खिलाड़ियों से मुलाकात की और कहा कि ‘खेलो इंडिया’ जैसे अभियानों ने ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच दिया है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदकों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि करेगा।
भारत ने 2036 ओलंपिक (LXXXVI Olympiad) की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी को अब एक राष्ट्रीय मिशन बना लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया घोषणा के बाद, खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने इस दिशा में रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है।
यहाँ भारत की तैयारियों और संभावित मेजबान शहरों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:
2036 ओलंपिक: भारत का ‘मिशन गोल्ड’ और तैयारी का रोडमैप
मुख्य दावेदार शहर: अहमदाबाद (गुजरात)
वर्तमान में अहमदाबाद भारत की दावेदारी का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं:
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सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव: यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम (नरेंद्र मोदी स्टेडियम) मौजूद है। साथ ही, ओलंपिक के अनुरूप 20 से अधिक खेलों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।
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तैयारी: गुजरात सरकार ने पहले ही “गुजरात ओलंपिक योजना और बुनियादी ढांचा निगम” का गठन कर लिया है।
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कनेक्टिविटी: बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट और आधुनिक मेट्रो नेटवर्क इसे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए एक आदर्श शहर बनाते हैं।
अन्य संभावित सहायक शहर (Multi-City Model)
आईओसी (IOC) के नए नियमों के अनुसार, अब खेलों का आयोजन एक से अधिक शहरों में किया जा सकता है। भारत इन शहरों को भी शामिल कर सकता है:
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दिल्ली: 1982 एशियाई खेल और 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स का अनुभव।
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मुंबई: अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के 141वें सत्र की मेजबानी का सफल अनुभव।
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वाराणसी/पुणे: छोटे या विशिष्ट खेलों (जैसे कुश्ती, वॉलीबॉल) के आयोजन के लिए।
मेजबानी के लिए भारत की रणनीतिक ताकत
| क्षेत्र | तैयारी का स्तर | मुख्य फोकस |
| बुनियादी ढांचा | मध्यम-उच्च | ‘खेलो इंडिया’ के तहत नए स्टेडियमों का निर्माण। |
| खिलाड़ी विकास | उच्च | TOPS (Target Olympic Podium Scheme) के जरिए एथलीटों को विश्व स्तरीय ट्रेनिंग। |
| डिजिटल इंडिया | बहुत उच्च | टिकटिंग, सुरक्षा और ब्रॉडकास्टिंग में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग। |
चुनौतियां और भविष्य की राह
मेजबानी की राह में भारत के सामने कतर, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों की कड़ी चुनौती है। भारत को इन क्षेत्रों पर काम करना होगा:
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लॉजिस्टिक्स और प्रदूषण: अंतरराष्ट्रीय एथलीटों के लिए बेहतर वायु गुणवत्ता और सुगम यातायात सुनिश्चित करना।
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पदक तालिका में सुधार: मेजबान देश के तौर पर भारत को शीर्ष 10-15 देशों में आने के लिए एथलीटों की तैयारी तेज करनी होगी।
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बिड प्रक्रिया (The Bid): 2025-26 के बीच भारत औपचारिक रूप से “लेटर ऑफ इंटेंट” के साथ अपनी बोली को और मजबूत करेगा।
आर्थिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि 2036 ओलंपिक की मेजबानी से भारत के पर्यटन, निर्माण और सेवा क्षेत्र में $30 बिलियन से $50 बिलियन तक का आर्थिक निवेश आ सकता है, जिससे लाखों रोजगार पैदा होंगे।
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