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DRDO SFDR Test: भारत ने रचा इतिहास, रैमजेट तकनीक के सफल परीक्षण से कांपेंगे दुश्मन; जानें इसकी ताकत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

नई दिल्ली. भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर तट पर सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल उड़ान परीक्षण किया है।

यह तकनीक भारत की अगली पीढ़ी की एयर-टू-एयर मिसाइलों को अधिक तेज़, लंबी दूरी तक मार करने वाली और लगभग अजेय बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

? क्या है ‘हवा से ईंधन’ वाली SFDR तकनीक?

परंपरागत मिसाइलें अपने साथ ईंधन के साथ-साथ ऑक्सीडाइज़र भी ले जाती हैं, जिससे वजन बढ़ता है और रेंज सीमित हो जाती है।
SFDR रैमजेट तकनीक इस कमी को पूरी तरह दूर करती है।

SFDR तकनीक की प्रमुख खूबियाँ

  • हवा से ऑक्सीजन का उपयोग: मिसाइल उड़ान के दौरान सामने से आने वाली हवा से ही ऑक्सीजन लेती है।
  • कम वजन, ज्यादा ताकत: ऑक्सीडाइज़र की जरूरत न होने से मिसाइल हल्की हो जाती है।
  • पूरी उड़ान में सुपरसोनिक गति: मिसाइल अंत तक तेज़ रफ्तार बनाए रखती है।

? SFDR परीक्षण की मुख्य जानकारी (4 फरवरी 2026)

  • स्थान: इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR), चांदीपुर, ओडिशा
  • लॉन्च समय: 3 फरवरी 2026, सुबह लगभग 10:45 बजे
  • परीक्षण प्रक्रिया:
    • पहले ग्राउंड बूस्टर मोटर से लॉन्च
    • सुपरसोनिक गति मिलने पर रैमजेट इंजन सक्रिय
  • तकनीकी सफलता:
    • नोज़ल-लेस बूस्टर
    • फ्यूल फ्लो कंट्रोलर
    • एयर-इनटेक सिस्टम
      सभी सिस्टम्स ने तय मानकों के अनुसार प्रदर्शन किया।

? भारत के लिए क्यों है यह तकनीक ‘गेम-चेंजर’?

1️⃣ एलीट देशों की श्रेणी में भारत

इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास एडवांस रैमजेट प्रोपल्शन तकनीक है।

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2️⃣ BVR युद्ध में निर्णायक बढ़त

SFDR तकनीक से लैस Astra Missile जैसी मिसाइलें दुश्मन विमान को Beyond Visual Range (BVR) में ही नष्ट करने में सक्षम होंगी।

3️⃣ दुश्मन के बचने की संभावना बेहद कम

पारंपरिक मिसाइलें अंतिम चरण में धीमी पड़ जाती हैं, जबकि रैमजेट मिसाइल अंत तक सुपरसोनिक स्पीड बनाए रखती है, जिससे दुश्मन विमान को दांव-पेंच दिखाने का मौका नहीं मिलता।

?️ रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस सफलता पर DRDO वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि—

“यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। भारत की मिसाइल क्षमताएं अब वैश्विक मानकों से भी आगे बढ़ रही हैं।”

? अगला कदम: Astra-Mk3 और वायुसेना की बढ़ती ताकत

अब इस SFDR तकनीक को Astra-Mk3 (गांडीव) जैसी लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों में शामिल किया जाएगा।
इससे भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर कई गुना बढ़ जाएगी और भारत को हवाई युद्ध में निर्णायक बढ़त मिलेगी।

SFDR रैमजेट तकनीक का सफल परीक्षण भारत की रक्षा यात्रा में सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि यह देश की रणनीतिक शक्ति, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में यह तकनीक भारतीय वायुसेना को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में निर्णायक साबित होगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।