नई दिल्ली. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर संसद से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा तेज है। विपक्ष जहां इस डील को किसानों के लिए खतरा बता रहा है, वहीं केंद्र सरकार लगातार यह स्पष्ट कर रही है कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से कोई समझौता नहीं किया गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज लोकसभा में सरकार का पक्ष मजबूती से रखते हुए कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरी रणनीति और ‘किसान-हित’ को ध्यान में रखकर किया गया है।
किसानों के लिए इस डील में क्या है सबसे खास?
🌾 कृषि और डेयरी सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित
पीयूष गोयल ने साफ कहा कि अमेरिकी डेयरी उत्पादों या सस्ते कृषि अनाज को भारतीय बाजार में खुली छूट नहीं दी जाएगी। भारत के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
🚫 पहले से तय थीं ‘रेड लाइन्स’
मंत्री ने बताया कि व्यापार वार्ता शुरू होने से पहले ही सरकार ने कुछ ‘रेड लाइन्स’ तय कर दी थीं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसानों, दुग्ध उत्पादकों और सहकारी समितियों की आजीविका पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
📉 टैरिफ में बड़ी राहत, निर्यात को बढ़ावा
समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए जवाबी टैरिफ को 50% से घटाकर लगभग 18% कर दिया है। इससे भारतीय कृषि निर्यात (Agri Exports) को वैश्विक बाजार में नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
🏭 ‘मेक इन इंडिया’ और ग्रामीण रोजगार
सरकार का कहना है कि यह डील आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान के अनुरूप है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश, प्रसंस्करण उद्योग और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
विपक्ष के आरोपों पर सरकार का पलटवार
लोकसभा में हंगामे के बीच पीयूष गोयल ने विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह समझौता चीन और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारत के लिए कहीं अधिक संतुलित और लाभकारी है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी स्पष्ट किया है कि भारतीय डेयरी क्षेत्र के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया गया है और किसानों की सुरक्षा से जुड़ी हर शर्त को डील में शामिल किया गया है।
सरकार का स्पष्ट संदेश
पीयूष गोयल ने सदन में कहा—
“मैं देश के 140 करोड़ लोगों और विशेषकर अपने किसान भाइयों को आश्वस्त करता हूं कि यह डील हर भारतीय के गौरव और हितों की रक्षा करने वाली है। कृषि और डेयरी हमारी संवेदनशील ताकत हैं, और उन्हें पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।”
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सरकार का दावा है कि यह किसान-हितैषी, निर्यात-प्रोत्साहक और रोजगार-सृजन वाला समझौता है। हालांकि विपक्ष इसके कुछ पहलुओं पर सवाल उठा रहा है, लेकिन केंद्र का कहना है कि आने वाले महीनों में निर्यात, निवेश और ग्रामीण रोजगार के आंकड़े खुद इस डील की तस्वीर साफ कर देंगे।
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