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कानपुर के मंधना स्थित महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज में भारी बवाल, छात्रों ने की तोड़फोड़, जानें क्या है वजह?

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

कानपुर. मंधना रोड पर स्थित महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज (MPEC) में कल देर शाम उस समय हालात बेकाबू हो गए, जब एक शिक्षक पर छात्रों के साथ गाली-गलौज और मारपीट के गंभीर आरोप लगे। इस घटना के बाद कॉलेज कैंपस और हॉस्टल में भारी हंगामा, तोड़फोड़ और तनाव का माहौल बन गया।

⚡ क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत अनुशासन से जुड़े एक मुद्दे को लेकर हुई। आरोप है कि एक फैकल्टी मेंबर ने कुछ छात्रों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उनके साथ मारपीट भी की। घटना की जानकारी फैलते ही हॉस्टल और कैंपस के अन्य छात्र आक्रोशित हो गए।

? हॉस्टल से कैंपस तक फैला हंगामा

घटना के बाद छात्रों का गुस्सा तेजी से बढ़ा और स्थिति हिंसक हो गई।

  • ? भारी तोड़फोड़: कॉलेज की खिड़कियों के शीशे तोड़े गए, फर्नीचर और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचा।
  • ? हॉस्टल में तनाव: सबसे पहले हंगामा हॉस्टल परिसर में शुरू हुआ, जो बाद में पूरे कॉलेज कैंपस में फैल गया।
  • ? नारेबाजी: छात्रों ने कॉलेज प्रशासन और आरोपी शिक्षक के खिलाफ जमकर नारे लगाए और सुरक्षा की मांग की।

? पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

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  • ? भारी पुलिस बल तैनात: बिठूर और मंधना क्षेत्र की पुलिस के साथ पीएसी (PAC) को भी मौके पर तैनात किया गया।
  • ? सीसीटीवी जांच: पुलिस कैंपस में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मारपीट और हिंसा की शुरुआत किसने की।
  • ? प्रबंधन का बयान: कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, हालांकि छात्रों में अभी भी नाराजगी बनी हुई है।

? नवीनतम अपडेट

  • कॉलेज प्रशासन द्वारा आंतरिक जांच समिति गठित करने की प्रक्रिया शुरू।
  • आरोपी शिक्षक को लेकर अस्थायी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
  • पुलिस दोनों पक्षों की भूमिका की जांच कर रही है, दोषियों पर कानूनी कार्रवाई के संकेत।

? छात्रों की प्रमुख मांगें

  • आरोपी शिक्षक की तत्काल बर्खास्तगी
  • कैंपस में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त आचार संहिता लागू हो

महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज की यह घटना केवल एक अनुशासन विवाद नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्र-सुरक्षा, शिक्षक-छात्र संबंध और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गई है। अब सभी की नजरें पुलिस जांच और कॉलेज प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।