नई दिल्ली. संसद के बजट सत्र का आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के सबसे तनावपूर्ण और चर्चित दिनों में दर्ज हो गया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में खड़े हुए, लेकिन विपक्ष के तीखे विरोध और नारेबाजी के चलते उन्हें बिना बोले ही बैठना पड़ा। हालात इतने बिगड़े कि लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।
विवाद की जड़: ‘Four Stars of Destiny’
इस पूरे घटनाक्रम की वजह बनी पूर्व थलसेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की चर्चित किताब Four Stars of Destiny। विपक्ष का आरोप है कि इस किताब में भारत-चीन सीमा से जुड़े कुछ ऐसे दावे किए गए हैं, जिन पर सरकार को संसद के भीतर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
सदन में क्या हुआ?
🔹 प्रधानमंत्री के खड़े होते ही हंगामा
जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी अपना संबोधन शुरू करने के लिए उठे, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसद वेल में आ गए।
🔹 नारेबाजी से ठप हुई कार्यवाही
लोकसभा में “सच्चाई बताओ” और “चीन पर चुप्पी तोड़ो” जैसे नारों से माहौल पूरी तरह गर्म हो गया। लगातार शोर-शराबे के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।
🔹 विपक्ष की मांग
विपक्ष, खासकर राहुल गांधी के नेतृत्व में, इस बात पर अड़ा रहा कि जनरल नरवणे की किताब में किए गए दावों पर पहले रक्षा मंत्री या प्रधानमंत्री संसद में बयान दें।
🔹 सत्ता पक्ष की अपील बेअसर
संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से अपील की कि प्रधानमंत्री का भाषण लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है और इसे बाधित न किया जाए, लेकिन शोर थमने का नाम नहीं लिया।
सत्ता पक्ष का कड़ा रुख: “लोकतंत्र का अपमान”
कार्यवाही स्थगित होने के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने संसद परिसर में विरोध जताया। सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष चर्चा से बचने के लिए सदन को बाधित कर रहा है और प्रधानमंत्री को बोलने से रोकना सीधे तौर पर देश की जनता की आवाज दबाने जैसा है।
क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
- बजट सत्र में पहली बार ऐसा हुआ जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री का जवाब पूरा नहीं हो सका।
- राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आया।
- आने वाले सत्रों में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के संकेत मिले।
आगे क्या?
अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या प्रधानमंत्री किसी अन्य दिन सदन में अपना जवाब रख पाएंगे या यह विवाद और लंबा खिंचेगा। साथ ही, नरवणे की किताब में किए गए दावों पर सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है।
लोकसभा का आज का दिन यह दिखाने के लिए काफी है कि संसद के भीतर राजनीतिक संघर्ष किस स्तर तक पहुंच चुका है। जहां सरकार इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन बता रही है, वहीं विपक्ष इसे जवाबदेही का सवाल कह रहा है। यह टकराव आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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