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दिल्ली विधानसभा में गूंजेंगे ‘अपने-अपने राम’: कुमार विश्वास की मधुर वाणी से सजेगी सांस्कृतिक शाम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

नई दिल्ली | सोमवार, 4 मई, 2026

दिल्ली विधानसभा का प्रांगण आगामी 6 मई को एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक उत्सव का गवाह बनने जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने घोषणा की है कि लोकतंत्र के इस मंदिर में भगवान राम के आदर्शों को जीवंत करने के लिए एक भव्य संगीतमय रामकथा का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण देश के सुप्रसिद्ध कवि और प्रखर वक्ता डॉ. कुमार विश्वास होंगे, जो अपनी सुप्रसिद्ध प्रस्तुति ‘अपने-अपने राम’ के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे।

सत्ता और आध्यात्म का अनूठा संगम

यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह राजनीति और लोक-नीति में नैतिक मूल्यों के समावेश का एक प्रयास भी है। अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के अनुसार:

  • अतिथियों की सूची: कार्यक्रम में दिल्ली कैबिनेट के मंत्रियों के साथ-साथ कई केंद्रीय मंत्रियों और गणमान्य हस्तियों को आमंत्रित किया गया है।

  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य समाज और शासन व्यवस्था में सत्यनिष्ठा, त्याग और कर्तव्यपरायणता जैसे मूल्यों को पुनर्जीवित करना है।

सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों की रिपोर्ट – matribhumisamachar.com/

क्यों खास है ‘अपने-अपने राम’?

डॉ. कुमार विश्वास की यह प्रस्तुति पारंपरिक रामकथा से थोड़ी भिन्न है। इसमें संगीत, समकालीन कविता और आधुनिक संदर्भों का समावेश होता है।

  1. युवाओं से जुड़ाव: यह कथा भगवान राम के संघर्षों को आज के दौर की चुनौतियों से जोड़कर प्रस्तुत करती है।

  2. नेतृत्व क्षमता: इसमें राम के ‘अनुकरणीय नेतृत्व’ और विपरीत परिस्थितियों में उनके संयम की व्याख्या की जाती है।

  3. सांस्कृतिक चेतना: विधानसभा परिसर में इस तरह का आयोजन लोकतांत्रिक संस्थानों में सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने की एक कड़ी है।

परिसर में व्यापक तैयारियां

रोहिणी से विधायक और विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि कार्यक्रम की भव्यता को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। विधानसभा के मुख्य प्रांगण को फूलों और पारंपरिक कलाकृतियों से सजाया जा रहा है। यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर कोई साहित्यिक-आध्यात्मिक आयोजन विधायी परिसर के भीतर होने जा रहा है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।