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आखिर स्टार प्लस को क्या ‘बात खटकी’? सोशल मीडिया पर कई दिनों के सस्पेंस के बाद सामने आया ‘बात खटकी तो जीत पक्की’

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई, सितम्बर, 2026: अगर पिछले कुछ दिनों में आपने स्टार प्लस का इंस्टाग्राम पेज देखा है, तो शायद किसी पोस्ट ने आपको एक पल रुककर दोबारा देखने पर मजबूर किया होगा। और यही तो इस पूरी मुहिम का उद्देश्य था।

पिछले कुछ दिनों से स्टार प्लस अपने पोस्ट्स, स्टोरीज़ और कमेंट सेक्शन में लगातार ‘बात खटकी’ का ज़िक्र कर रहा था। इसे देखकर हर किसी के मन में बस एक ही सवाल था, आखिर स्टार प्लस को कौन-सी बात खटक रही है?

लेकिन, बात यहीं नहीं रुकी। स्टार प्लस ने अपने कुछ लोकप्रिय शोज़ के पोस्टर्स में चुपके से छोटे-छोटे बदलाव भी कर दिए। जाने-पहचाने पोस्टर्स में कुछ अलग दिख रहा था, कुछ ऐसा जो पहली नज़र में शायद पकड़ में न आए। फैंस के लिए यह एक मज़ेदार खेल बन गया कि आखिर उनके पसंदीदा शो के पोस्टर में ऐसा क्या बदला है, जो उन्हें ‘खटक’ रहा है।

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सस्पेंस तब और बढ़ गया, जब स्टार प्लस के चहेते अरमान-अभिरा, सौम्या-जीत, अप्पू और ईशान-नयोनिका भी इस चर्चा में शामिल हो गए। देखते ही देखते ‘बात खटकी’ लोकप्रिय ब्रांड्स के कमेंट सेक्शन में भी दिखाई देने लगी। अब हर किसी के मन में एक ही सवाल था, आखिर यह हो क्या रहा है, भाई?

खैर, अब बात समझ आ गई है। अपने शोज़ के एंड पेज और रिवील क्रिएटिव्स के ज़रिए स्टार प्लस ने आखिरकार इस सस्पेंस से पर्दा उठा दिया है। पिछले कुछ दिनों से हर तरफ नज़र आ रही ‘बात खटकी’ दरअसल ‘बात खटकी तो जीत पक्की’ की ओर इशारा था, जो अनिल कपूर के आने वाले रियलिटी शो ‘इंडिया के टॉप 1%’ से जुड़ा है।

इस पूरी मुहिम के पीछे सोच बेहद आसान है। कई बार कोई छोटी-सी बात आपका ध्यान खींचती है और आपको दोबारा देखने पर मजबूर कर देती है। जो चीज़ बाकी लोगों की नज़र से छूट जाए, वही शायद आपकी नज़र पकड़ ले। और ‘इंडिया के टॉप 1%’ में ऐसी ही छोटी-सी बात पकड़ लेना आपको बड़ी जीत के और करीब ले जा सकता है।

तो अगली बार कोई बात खटके, उसे नज़रअंदाज़ मत करना। क्या पता, वही आपकी ‘जीत पक्की’ कर दे।

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‘इंडिया के टॉप 1%’ का प्रीमियर 19 सितंबर को रात 8 बजे स्टार प्लस और जियोहॉटस्टार पर होगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।