लोड हो रहा है...

राजधानी लखनऊ में धर्म संसद का आयोजन: मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर का मुद्दा छाया, अखिलेश यादव के नाम लगे पोस्टर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर के पुनरोद्धार का मुद्दा केंद्र बिंदु बना रहा। धर्म संसद में देश और विदेश (लगभग 21 देशों) से पधारे प्रमुख संतों, धार्मिक विचारकों और हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों ने भगवान श्रीकृष्ण की मूल जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की अपनी संकल्पबद्धता को दोहराया।

 

धर्म संसद की प्रमुख मांगें और धार्मिक संकल्प

- Advertisement -

धर्म संसद को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ धाम के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि हिंदू समाज की आस्था का सबसे प्रमुख विषय है।

  • भव्य मंदिर निर्माण की घोषणा: वक्ताओं का मत था कि सनातन धर्म की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने के लिए जन्मभूमि परिसर से शाही ईदगाह संरचना को हटाकर वहां भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए।
  • अंतरराष्ट्रीय संतों का समर्थन: आयोजकों (विश्व हिंदू रक्षा परिषद आदि) के अनुसार, इस समागम में सनातन धर्म के वैश्विक प्रचार और धार्मिक अधिकारों की रक्षा पर विस्तृत चर्चा की गई।

 

लखनऊ में राजनीतिक पोस्टर विवाद: अखिलेश यादव से रुख स्पष्ट करने की अपील

धर्म संसद के आयोजन से ठीक पहले लखनऊ के प्रमुख चौराहों (जैसे 1090 चौराहा और विक्रमादित्य मार्ग) पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए विवादित पोस्टर लगाए गए।

इन पोस्टरों में लिखा गया था:

- Advertisement -

“जैसे ईद पर ईदगाह जाते हैं, वैसे ही धर्म संसद में आएं और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण पर अपना रुख स्पष्ट करें।“

पोस्टरों पर लोकप्रिय राजनीतिक-धार्मिक नारा “अयोध्या, काशी तो बस झांकी है, अब केवल मथुरा ही बाकी है“ भी अंकित था। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि ये संदेश आयोजक पक्ष की ओर से थे और इनका समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव के आधिकारिक वक्तव्य से कोई संबंध नहीं है।

 

मथुरा विवाद का कानूनी और न्यायिक पहलू

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद वर्तमान में इलाहाबाद उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष न्यायिक प्रक्रिया में है।

  • पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991: यह अधिनियम 15 अगस्त 1947 को मौजूद धार्मिक स्थलों के स्वरूप को बनाए रखने का प्रावधान करता है। हालांकि, हिंदू पक्ष की याचिकाओं में इस बात पर बहस चल रही है कि क्या यह अधिनियम इस विशिष्ट मामले पर लागू होता है या नहीं।
  • न्यायिक स्वायत्तता: धर्म संसद में उठाई गई राजनीतिक एवं सामाजिक मांगों और अदालत में चल रही संवैधानिक व न्यायिक प्रक्रिया को अलग-अलग परिप्रेक्ष्य में देखा जाना आवश्यक है। अंतिम निर्णय देश की न्यायिक प्रणाली के तहत ही मान्य होगा।

 

संदर्भ और उपयोगी लिंक्स

  • मथुरा एवं उत्तर प्रदेश की अन्य प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक खबरों की विस्तृत कवरेज के लिए Matribhumi Samachar पर विजिट करें।

 

Frequently Asked Questions (FAQ)

लखनऊ में धर्म संसद का मुख्य उद्देश्य क्या था?

लखनऊ धर्म संसद का मुख्य उद्देश्य मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में भव्य मंदिर निर्माण की मांग को उठाना तथा सनातन धर्म के धार्मिक और कानूनी पहलुओं पर विचार-विमर्श करना था।

धर्म संसद से पहले अखिलेश यादव का नाम चर्चा में क्यों आया?

लखनऊ के प्रमुख चौराहों पर विश्व हिंदू रक्षा परिषद द्वारा ऐसे पोस्टर लगाए गए थे जिनमें अखिलेश यादव से धर्म संसद में शामिल होने और मथुरा मंदिर निर्माण पर अपना रुख स्पष्ट करने का न्योता दिया गया था।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामला न्यायालय में किस चरण पर है?

यह मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जहाँ विभिन्न सिविल वादों की पोषणीयता (maintainability) और पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के तहत कानूनी पहलुओं पर सुनवाई चल रही है।

 

Disclaimer

यह लेख सार्वजनिक समाचार स्रोतों एवं रिपोर्टों पर आधारित एक विश्लेषणात्मक विवरण है। इसमें व्यक्त किए गए पोस्टर संदेश आयोजक संगठनों के विचार हैं और इन्हें किसी राजनीतिक दल का आधिकारिक बयान न माना जाए। श्रीकृष्ण जन्मभूमि–शाही ईदगाह मामला अदालत में विचाराधीन है और इसका अंतिम निर्णय न्यायपालिका द्वारा ही लिया जाएगा।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।