लोड हो रहा है...

नाइजीरिया में बंदूकधारियों का तांडव: 30 से अधिक ग्रामीणों की हत्या, बाजार और घर फूंके

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

मिन्ना. उत्तरी नाइजीरिया के नाइजर राज्य में एक बार फिर खून-खराबे की खबर सामने आई है। शाम हथियारों से लैस ‘दस्युओं’ (Bandits) के एक बड़े समूह ने कासुवान-दाजी (Kasuwan-Daji) गांव पर हमला कर कम से कम 30 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी। स्थानीय सूत्रों और चर्च के अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या 40 से अधिक हो सकती है।

हमले का विवरण

पुलिस और चश्मदीदों के अनुसार, बंदूकधारियों ने बोर्गु (Borgu) स्थानीय सरकारी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस गांव को शनिवार शाम को घेरा। हमलावरों ने गांव में घुसते ही अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। दहशत फैलाने के लिए उन्होंने स्थानीय बाजार, दुकानों और कई घरों को आग के हवाले कर दिया।

  • अपहरण: बंदूकधारी न केवल हत्याएं कीं, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों को अगवा भी कर ले गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं।

  • लूटपाट: हमलावरों ने गांव से खाद्यान्न और पशुओं की भी लूटपाट की।

विरोधाभासी दावे और सुरक्षा स्थिति

नाइजर राज्य पुलिस के प्रवक्ता वासिउ अबियोदुन ने 30 मौतों की पुष्टि की है, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई लोग अभी भी लापता हैं, जिससे टोल बढ़ने की आशंका है। कोंटागोरा डायोसीज़ के कैथोलिक चर्च ने दावा किया है कि इस नरसंहार में 40 से अधिक लोग मारे गए हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बल समय पर नहीं पहुंचे, जिससे हमलावरों को घंटों तक तांडव मचाने का मौका मिल गया। यह गांव उस क्षेत्र के करीब है जहाँ पिछले साल नवंबर में एक स्कूल से सैकड़ों बच्चों का अपहरण किया गया था।

राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया

नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला टिनूबू ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों को अपराधियों का पीछा करने और बंधकों को सुरक्षित छुड़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, “इन आतंकवादियों ने हमारे देश के संकल्प की परीक्षा ली है और उन्हें उनके आपराधिक कृत्यों का पूरा परिणाम भुगतना होगा।”

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।