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बॉक्स ऑफिस: ‘धुरंधर’ की लहर के बीच ‘इक्कीस’ ने पकड़ी रफ्तार, पहले वीकेंड में कमाए ₹20 करोड़

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई: श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी और अगस्त्य नंदा स्टारर वॉर-ड्रामा फिल्म ‘इक्कीस’ ने बॉक्स ऑफिस पर अपना पहला वीकेंड पूरा कर लिया है। नए साल के मौके पर (1 जनवरी 2026) रिलीज हुई इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है, हालांकि इसे रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

वीकेंड कलेक्शन की मुख्य बातें

सैकनिल्क (Sacnilk) और ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ने अपने पहले चार दिनों में एक सम्मानजनक आंकड़ा छुआ है:

  • ओपनिंग डे (गुरुवार): ₹7.00 करोड़ (न्यू ईयर हॉलिडे का लाभ मिला)

  • दूसरे दिन (शुक्रवार): ₹3.50 करोड़ (50% की गिरावट देखी गई)

  • तीसरे दिन (शनिवार): ₹4.65 करोड़ (करीब 33% का उछाल)

  • चौथे दिन (रविवार): ₹4.30 – ₹4.68 करोड़ (प्रारंभिक अनुमान)

  • कुल कलेक्शन (4 दिन): लगभग ₹19.50 – ₹20.00 करोड़ (भारत नेट)

फिल्म के लिए चुनौतियां और सकारात्मक पक्ष

फिल्म का बजट लगभग ₹60 करोड़ बताया जा रहा है, जिसे देखते हुए फिल्म को आने वाले वर्किंग डेज (सोमवार से गुरुवार) में अपनी पकड़ मजबूत रखनी होगी।

कड़ी प्रतिस्पर्धा: फिल्म की कमाई पर सबसे बड़ा असर पहले से चल रही ‘धुरंधर’ का है, जो अपने पांचवें हफ्ते में भी दोहरा शतक लगाने की ओर बढ़ रही है। साथ ही हॉलीवुड फिल्म ‘अवतार: फायर एंड ऐश’ भी दर्शकों को अपनी ओर खींच रही है।

भावुक विदाई: यह दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म है, जो दर्शकों के लिए एक इमोशनल कनेक्ट का काम कर रही है।

अगस्त्य नंदा का डेब्यू: अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा ने सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के रूप में अपनी थिएटर डेब्यू फिल्म से समीक्षकों को काफी प्रभावित किया है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।