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70 साल के सपा नेता हाजी खलील ने किया 20 साल की लड़की से चौथा निकाह; दूसरी बीवी पहुँची पुलिस के पास

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

गाजियाबाद | मंगलवार, 5 मई 2026  

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि सामाजिक और कानूनी बहस को भी जन्म दे दिया है। समाजवादी पार्टी के नेता हाजी खलील, जिनकी उम्र 70 वर्ष है, ने अपने से 50 साल छोटी लड़की यासमीन (20 वर्ष) से चौथा निकाह किया है। इस निकाह के बाद उनके परिवार में छिड़ा कलह अब पुलिस की चौखट तक पहुँच गया है।

क्या है पूरा मामला?

हाजी खलील पहले से ही तीन शादियाँ कर चुके हैं और उनके 11 बच्चे हैं। जानकारी के मुताबिक, उनकी पहली पत्नी से 8 बच्चे हैं। बताया जा रहा है कि तीसरी पत्नी से कोई संतान नहीं होने के कारण उन्होंने चौथी बार घर बसाने का फैसला किया। हालांकि, उनके इस कदम ने उनकी दूसरी पत्नी, नाजरीन, को सड़क पर उतरने पर मजबूर कर दिया।

दूसरी बीवी के गंभीर आरोप

मंगलवार को हाजी खलील की दूसरी पत्नी नाजरीन अपने बेटे के साथ गाजियाबाद कमिश्नर ऑफिस पहुँचीं। उन्होंने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए अपने शौहर पर गंभीर आरोप लगाए:

  • इस्तेमाल करने का आरोप: नाजरीन का कहना है कि हाजी खलील का एक ‘पैटर्न’ है—वह निकाह करते हैं, बच्चे पैदा करते हैं और फिर पत्नी को बेसहारा छोड़ देते हैं।

  • जान से मारने की धमकी: जब नाजरीन ने इस चौथे निकाह का विरोध किया, तो आरोप है कि हाजी खलील ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी।

  • अवैध कब्जा और भ्रष्टाचार: शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाजी खलील ने गाजियाबाद के कैला भट्टा इलाके में नगर निगम की लगभग 30 करोड़ रुपये की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है, जहाँ उन्होंने मदरसा, मस्जिद और दुकानें बनाकर उन्हें किराए पर दे रखा है।

प्रशासनिक रुख

एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने नाजरीन की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की निष्पक्ष जाँच के आदेश दिए हैं। पुलिस अब हाजी खलील के खिलाफ लगे घरेलू हिंसा, धमकी और अवैध कब्जे के आरोपों की पड़ताल कर रही है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।