लोड हो रहा है...

‘गजनी’ और ‘लगान’ फेम अभिनेता प्रदीप रावत का 74 की उम्र में निधन, कैंसर से हार गए जिंदगी की जंग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई: भारतीय सिनेमा में अपनी दमदार खलनायकी और अभिनय से अमिट छाप छोड़ने वाले वरिष्ठ अभिनेता प्रदीप रावत का 4 अगस्त 2026 की शाम मुंबई में निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से ब्लड कैंसर से जंग लड़ रहे थे।

अभिनेता के मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने उनके निधन की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रदीप रावत को चार साल पहले भी कैंसर हुआ था, जिससे वह उबर चुके थे, लेकिन पिछले डेढ़ महीने में बीमारी का दोबारा अटैक (रिलैप्स) हुआ। अचानक प्लेटलेट्स कम होने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली।

5 अगस्त को होगा अंतिम संस्कार

प्रदीप रावत का पार्थिव शरीर उनके गोरेगांव स्थित आवास पर अंतिम दर्शनों के लिए रखा जाएगा, जिसके बाद जोगेश्वरी पश्चिम स्थित ओशिवारा श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। वह अपने पीछे पत्नी कल्याणी रावत और बेटे विक्रमादित्य रावत को छोड़ गए हैं।

- Advertisement -

‘महाभारत’ के अश्वत्थामा से ‘गजनी’ तक का सफर

| महत्वपूर्ण मील के पत्थर | विवरण |

|—|—|

| टेलीविजन की शुरुआत | बी.आर. चोपड़ा के धारावाहिक ‘महाभारत’ (1988) में अश्वत्थामा के किरदार से घर-घर में मशहूर हुए। |

| बॉलीवुड में पहचान | फिल्म ‘लगान’ (2001) में सिख योद्धा देवा और ‘सरफरोश’ (1999) में सुल्तान की भूमिका से सराहना पाई। |

- Advertisement -

| आइकॉनिक विलेन | आमिर खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गजनी’ (तमिल व हिंदी दोनों) में खूंखार मुख्य खलनायक ‘गजनी धर्मात्मा’ का किरदार निभाया। |

| साउथ सिनेमा में जलवा | एसएस राजामौली की फिल्म ‘साइ’ (Sye) के अलावा कई तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में यादगार खलनायक के रोल किए। |

| हालिया काम | विकी कौशल स्टारर फिल्म ‘छावा’ में यसाजी कंक का किरदार निभाया। |

फिल्म जगत में शोक की लहर

प्रदीप रावत के निधन की खबर से सिनेमा जगत में शोक व्याप्त है। ‘लगान’ में उनके सह-कलाकार रहे अभिनेता यशपाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमारे गजनी और लगान के देवा प्रदीप रावत अब नहीं रहे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।” इसके साथ ही अभिनेता सोनू सूद, गजेंद्र चौहान और अन्य हस्तियों ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।