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फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था को लेकर फूटा छात्रों का गुस्सा: 500 से अधिक स्कूल प्रभावित, आंदोलन विश्वविद्यालयों तक पहुँचा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

पेरिस।

फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की गिरती स्थिति, शिक्षकों की भारी कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर छात्रों का आक्रोश सड़कों पर आ गया है। सितंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ यह हाईस्कूल आंदोलन अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरे देश में फैल चुका है।

 

500 से अधिक स्कूलों में कामकाज ठप

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शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, फ्रांस भर में करीब 400 से 560 हाईस्कूल पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहे हैं। छात्र परिसरों के मुख्य द्वारों को अवरुद्ध कर रहे हैं। कुछ शहरों में हिंसक झड़पों, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं, जिसके चलते सुरक्षा बलों को आंसू गैस का प्रयोग करना पड़ा और 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।

 

छात्रों की 10 मुख्य मांगें

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं, बल्कि अपनी रोजमर्रा की पढ़ाई से जुड़ी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए सड़कों पर उतरे हैं। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  • कक्षाओं में छात्रों की संख्या पर सीमा: ओवरक्रोडेड (अत्यधिक भीड़ वाली) कक्षाओं को नियंत्रित करना।
  • पर्याप्त शिक्षक और स्टाफ: स्थाई शिक्षकों और अनुपस्थिति के दौरान तुरंत स्थानापन्न (substitute) शिक्षकों की नियुक्ति।
  • पुराने स्कूल भवनों का जीर्णोद्धार: जर्जर इमारतों और गर्मी के दौरान असुविधाजनक कक्षाओं की स्थिति में सुधार।
  • सहायता कर्मचारियों की तैनाती: स्कूलों में पर्याप्त मनोवैज्ञानिक, नर्स और परामर्शदाता (counselors) उपलब्ध कराना।
  • उच्च शिक्षा दबाव में राहत: ‘Parcoursup’ (विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया) के तनाव को कम करना।
  • समान अवसर: सामाजिक और आर्थिक असमानता के कारण पिछड़ रहे छात्रों को अतिरिक्त सहायता देना।
  • शिक्षा क्षेत्र में बजट वृद्धि: आगामी राज्य बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए अधिक वित्तीय आवंटन।

 

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आंदोलन का विस्तार: विश्वविद्यालयों और ट्रेड यूनियनों का समर्थन

हाईस्कूल स्तर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब विश्वविद्यालयों तक पहुँच गया है। विश्वविद्यालय परिसरों में भी शिक्षा नीति और बजट कटौती के खिलाफ सभाएं आयोजित हो रही हैं। सिविल सर्वेंट्स और शिक्षक यूनियनों के इस विरोध में शामिल होने से स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।

 

सरकार का रुख और सुधारों के दावे

फ्रांस सरकार ने स्वीकार किया है कि छात्रों की चिंताओं पर बातचीत आवश्यक है। सरकार का दावा है कि:

  1. गणित और विज्ञान विषयों को मजबूत करने के लिए नए पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं।
  2. शिक्षकों की भर्ती और प्रशिक्षण प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है।
  3. विश्वविद्यालय छात्रों के लिए रियायती दर पर भोजन और छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तार किया गया है।

हालांकि, छात्र संगठनों का कहना है कि ये कदम समस्याओं की गंभीरता की तुलना में नाकाफी हैं।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. फ्रांस में छात्र आंदोलन कब और क्यों शुरू हुआ?

उत्तर: यह आंदोलन सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में शुरू हुआ। इसका मुख्य कारण ओवरक्रोडेड कक्षाएं, शिक्षकों की कमी, पुराने स्कूल भवन और सरकारी शिक्षा बजट में कटौती है।

Q2. इस प्रदर्शन से कितने स्कूल प्रभावित हुए हैं?

उत्तर: देश भर के लगभग 400 से 560 हाईस्कूल इस प्रदर्शन के कारण प्रभावित या बंद रहे हैं।

Q3. प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांग क्या है?

उत्तर: छात्र कक्षाओं में छात्रों की संख्या घटाने, नए शिक्षकों की तुरंत भर्ती करने, स्कूल भवनों के जीर्णोद्धार और स्कूलों में नर्स व मनोवैज्ञानिकों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और हालिया छात्र विरोध प्रदर्शनों पर आधारित उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और विश्लेषणात्मक संदर्भों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है।

 

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अतिरिक्त विस्तृत अंतर्राष्ट्रीय समाचारों और फ्रांस की खबरों के लिए Matribhumi Samachar English Edition पर जाएं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।