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तकनीकी और मानवीय सतर्कता का कमाल: पूर्वोत्तर रेलवे ने AI और ‘Plan Bee’ से बचाई 255 हाथियों की जान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

गुवाहाटी।

पूर्वोत्तर भारत के घने जंगलों और अभयारण्यों से गुजरने वाली रेल लाइनें लंबे समय से वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों के लिए जोखिम भरा क्षेत्र रही हैं। हालांकि, आधुनिक तकनीक, त्वरित निर्णय क्षमता और मानवीय सतर्कता के मेल से अब इस स्थिति में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। Northeast Frontier Railway (NFR) ने जानकारी दी है कि जनवरी से सितंबर 2026 के बीच उनके अधिकार क्षेत्र में 255 हाथियों को संभावित ट्रेन दुर्घटनाओं से सुरक्षित बचा लिया गया।

 

विभाजन–वार सुरक्षा आंकड़े (Division-wise Breakup)

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पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के विभिन्न मंडलों में वास्तविक समय (Real-Time) पर मिली चेतावनियों और रेलवे कर्मचारियों की मुस्तैदी के चलते कई बड़े हादसे टले हैं। बचाए गए हाथियों का विवरण इस प्रकार है:

डिवीजन (Division)बचाए गए हाथियों की संख्या
लुमडिंग (Lumding)122
अलीपुरद्वार (Alipurduar)106
तिनसुकिया (Tinsukia)15
रंगिया (Rangiya)14
कुल योग (Total)255

 

तकनीक का प्रभावी उपयोग: AI और ‘Plan Bee’

हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए NFR कई इनोवेटिव तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है:

AI आधारित Intrusion Detection System (IDS)

NFR ने संवेदनशील क्षेत्रों में Distributed Acoustic System (DAS) पर आधारित AI घुसपैठ पहचान प्रणाली (IDS) तैनात की है। यह सिस्टम ऑप्टिकल फाइबर केबल के माध्यम से रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों के कदमों की धमक और गतिविधियों का सटीक पता लगाता है।

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  • सिस्टम तुरंत संबंधित कंट्रोल रूम और स्टेशन मास्टर को रियल–टाइम अलर्ट भेजता है।
  • सूचना मिलते ही ट्रेन के लोको पायलट (चालक दल) को सतर्क किया जाता है और ट्रेन की गति कम कर दी जाती है।

‘Plan Bee’ तकनीक का कमाल

‘Plan Bee’ एक अनोखा ऑडियो-विजुअल डिवाइस है जो रेलवे पटरियों के पास स्थापित किया जाता है।

  • यह उपकरण मधुमक्खियों के झुंड की तेज भनभनाहट (Buzzing Sound) प्रसारित करता है।
  • हाथियों में मधुमक्खियों के डंक से बचने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है, इसलिए वे इस आवाज को सुनते ही रेलवे ट्रैक से दूर चले जाते हैं।

 

सुरक्षा के अन्य मानवीय व संरचनात्मक उपाय

तकनीकी उपकरणों के साथ-साथ रेलवे प्रशासन ने ज़मीनी स्तर पर भी कई कदम उठाए हैं:

  1. रात के समय गति सीमा (Speed Restrictions): हाथी बहुल इलाकों में रात के दौरान ट्रेनों की गति पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
  2. विशेष गश्त और प्रशिक्षण: रेल कर्मचारियों और चालकों को वन्यजीवों की संभावित गतिविधियों को पहचानने और आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने का प्रशिक्षण दिया गया है।
  3. वन विभाग से समन्वय: रेलवे और राज्य वन विभागों के बीच त्वरित सूचना साझाकरण के लिए मजबूत हॉटलाइन समन्वय स्थापित किया गया है।
  4. वन्यजीव अंडरपास (Underpasses): हाथियों को बिना पटरियों पर आए सुरक्षित रास्ता देने के लिए चिन्हित कॉरिडोरों पर अंडरपास बनाए जा रहे हैं।
  5. खाद्य कचरे पर कड़ा प्रतिबंध: यात्रियों को पटरियों के पास भोजन या जैविक कचरा न फेंकने के लिए जागरूक किया जा रहा है, ताकि गंध की वजह से हाथी पटरियों की ओर न आकर्षित हों।

 

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1. AI आधारित Intrusion Detection System (IDS) कैसे काम करता है?

यह प्रणाली Distributed Acoustic System (DAS) का उपयोग करती है, जो रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों के चलने से उत्पन्न होने वाले कंपन (Vibrations) को पहचानकर रियल-टाइम अलर्ट भेजती है।

Q2. रेलवे ट्रैक पर ‘Plan Bee’ क्या है?

‘Plan Bee’ एक ऐसी तकनीक है जिसमें मधुमक्खियों की भनभनाहट की आवाज प्रसारित की जाती है। हाथी मधुमक्खियों से प्राकृतिक रूप से दूर भागते हैं, जिससे वे ट्रैक के करीब नहीं आते।

Q3. 2026 में कितने हाथियों को संभावित हादसों से बचाया गया?

जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान Northeast Frontier Railway (NFR) के तहत कुल 255 हाथियों को सुरक्षित बचाया गया।

 

Disclaimer (अस्वीकरण)

यह लेख उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति और प्रामाणिक समाचार विवरणों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य रेलवे और वन्यजीव संरक्षण के संदर्भ में जन–जागरूकता बढ़ाना है।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।