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“सोनी सब के ‘गणेश कार्तिकेय’ में भगवान शिव की भूमिका निभाने से मुझे धैर्य और भावनात्मक शक्ति को अपनाने में मदद मिली”: अविनेश रेखी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

मुंबई, फरवरी, 2026: जब देश महाशिवरात्रि के शुभ अवसर की तैयारियों में जुटा है, अभिनेता अविनेश रेखी, जो सोनी सब के गाथा शिव परिवार की- गणेश कार्तिकेय में भगवान शिव की शक्तिशाली और करुणामयी भूमिका निभा रहे हैं, ने इस पर्व के गहरे अर्थ और इस किरदार के उनके जीवन पर पड़े गहन प्रभाव पर विचार साझा किए हैं।

महाशिवरात्रि, जो आंतरिक जागरण, संतुलन और उच्च चेतना के प्रति समर्पण का प्रतीक है, इस वर्ष अविनेश के लिए विशेष महत्व रखती है। भगवान शिव की भूमिका निभाना उनके लिए एक आध्यात्मिक रूप से समृद्ध अनुभव रहा है, जिसने उन्हें शक्ति, करुणा और जिम्मेदारी को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर दिया।

महाशिवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व पर बोलते हुए अविनेश ने कहा, “महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं है, यह हमें ठहरने, आत्मचिंतन करने और अपने भीतर से जुड़ने की याद दिलाती है। गणेश कार्तिकेय में भगवान शिव का चित्रण मेरे लिए अत्यंत विनम्र और परिवर्तनकारी अनुभव रहा है। भगवान शिव केवल शक्ति के देवता नहीं हैं, बल्कि अपार शांति, करुणा और संतुलन के भी प्रतीक हैं। इस किरदार के साथ हर दिन जीने से मुझे स्थिरता और विश्वास के महत्व को समझने में मदद मिली है, खासकर आज की तेज़-तर्रार दुनिया में।”

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उन्होंने आगे कहा कि इस अवसर ने शो में उनके अनुभव को और भी विशेष बना दिया है। अविनेश ने जोड़ा, “गणेश कार्तिकेय के माध्यम से हम भगवान शिव को केवल बुराई के संहारक के रूप में नहीं, बल्कि एक पोषण करने वाले पिता और भगवान गणेश व भगवान कार्तिकेय के मार्गदर्शक के रूप में भी दिखा रहे हैं। भगवान शिव की भूमिका निभाने ने मुझे धैर्य, विनम्रता और भावनात्मक शक्ति को अपनाना सिखाया है। महाशिवरात्रि के इस शुभ अवसर पर मैं कामना करता हूँ कि भगवान शिव सभी को आशीर्वाद दें और यह रात्रि हर किसी के जीवन में परिवर्तन और सकारात्मकता लेकर आए।”

देखिए गणेश कार्तिकेय, हर सोमवार से शनिवार रात 8 बजे, केवल सोनी सब पर।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।