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ब्रज के विरक्त संत और मान मंदिर बरसाना के संस्थापक पद्मश्री रमेश बाबा हुए ब्रह्मलीन: शोक में डूबा पूरा ब्रजमंडल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

मथुरा।

ब्रजभूमि की पावन माटी, भक्ति परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के संवाहक पद्मश्री रमेश बाबा का मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। 88 से 90 वर्ष की आयु में बरसाना स्थित उनकी प्रमुख साधना स्थली मान मंदिर में उन्होंने अंतिम सांस ली।

रमेश बाबा के देवलोकगमन की खबर फैलते ही केवल बरसाना ही नहीं, बल्कि पूरे ब्रजक्षेत्र, संत समाज और देश-विदेश में फैले उनके लाखों श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई है। संत समाज और अनुयायियों ने उनके निधन को एक युग का अंत और आध्यात्मिक व सामाजिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।

 

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रमेश बाबा का शुरुआती जीवन और ब्रज आगमन

रमेश बाबा का जन्म 1938 में तीर्थराज प्रयागराज में हुआ था। उनके पिता बलदेव प्रसाद शुक्ल एक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य थे। बचपन से ही उनके मन में भक्ति भाव और वैराग्य प्रबल था।

1950 के दशक में, लगभग 15-16 वर्ष की अल्पआयु में ही वे सब कुछ त्याग कर बरसाना (मथुरा) आ गए। उन्होंने बरसाना के श्रीजी मंदिर में मृदंग वादन से अपनी साधना शुरू की और बाद में ब्रह्मांचल पर्वत पर मान मंदिर की स्थापना की।

 

ब्रज, वन और पर्वतों के संरक्षण के लिए ऐतिहासिक आंदोलन

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रमेश बाबा केवल एक एकांतवादी साधक नहीं थे, बल्कि वे पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने वाले अग्रणी योद्धा थे।

  1. पहाड़ों को खनन से बचाना: उन्होंने ब्रज की पौराणिक पहाड़ियों और गहवरवन को अवैध खनन व विनाश से बचाने के लिए सफल जन-आंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी दूरदर्शी पहल के कारण ही सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने ब्रज की पहाड़ियों में खनन रोकने का ऐतिहासिक आदेश दिया था।
  2. यमुना स्वच्छता अभियान: पवित्र यमुना मैया को प्रदूषण मुक्त करने और अविरल बहाव के लिए उन्होंने समय-समय पर बड़े पैमाने पर जनजागरण अभियान चलाए।
  3. मुफ्त राधारानी ब्रजयात्रा: 1968 में उन्होंने ब्रज चौरासी कोस यात्रा की परंपरा को पुनर्जीवित किया। आज मान मंदिर के सौजन्य से हर वर्ष हजारों श्रद्धालु पूर्णतः निःशुल्क ब्रजयात्रा करते हैं।

 

‘माताजी गौशाला’ और अभूतपूर्व गोसेवा

रमेश बाबा का जीवन गोवंश की रक्षा और सेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने बरसाना में माताजी गौशाला की स्थापना की।

  • यह गौशाला एशिया की सबसे बड़ी गौशालाओं में से एक मानी जाती है, जहाँ 60,000 से अधिक असहाय, वृद्ध और कसाइयों के चंगुल से छुड़ाई गई गायों की निस्वार्थ सेवा की जाती है।

 

वर्ष 2019 में मिला पद्मश्री सम्मान

पर्यावरण संरक्षण, गोसेवा, प्राकृतिक संपदा की रक्षा और सामाजिक चेतना फैलाने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2019 में रमेश बाबा को देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्मश्री से सम्मानित किया था।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. मान मंदिर बरसाना के संस्थापक कौन थे?

उत्तर: मान मंदिर बरसाना के संस्थापक विरक्त संत पद्मश्री रमेश बाबा थे।

Q2. रमेश बाबा का निधन कब हुआ?

उत्तर: उनका निधन मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को बरसाना स्थित मान मंदिर में हुआ।

Q3. रमेश बाबा को पद्मश्री पुरस्कार कब मिला था?

उत्तर: उनके गोसेवा और पर्यावरण संरक्षण के अतुलनीय कार्यों के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

Q4. रमेश बाबा द्वारा स्थापित माताजी गौशाला कहाँ स्थित है?

उत्तर: माताजी गौशाला उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में बरसाना के निकट स्थित है।

 

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अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख 6 अक्टूबर 2026 को प्राप्त समाचार व सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्रामाणिक जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं और पाठकों तक सही सूचनाएँ एवं संत रमेश बाबा के जीवन संघर्ष की जानकारी पहुँचाना है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।