मुंबई. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। विभिन्न आर्थिक विश्लेषकों और हालिया अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 (FY26) में भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 7.4% के आसपास रहने की संभावना है। यह वृद्धि दर भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से बनाए रखेगी।
विकास को गति देने वाले मुख्य कारक:
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मज़बूत घरेलू खपत: मध्यम वर्ग की बढ़ती आय और ग्रामीण इलाकों में मांग में सुधार से बाजार में तेज़ी बनी हुई है।
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सरकारी निवेश: बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर सरकार का निरंतर खर्च और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों से औद्योगिक गतिविधियों को बल मिल रहा है।
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विनिर्माण क्षेत्र में उछाल: पीएलआई (PLI) स्कीम के सफल कार्यान्वयन के कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश और उत्पादन दोनों बढ़े हैं।
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डिजिटल अर्थव्यवस्था: फिनटेक और डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने आर्थिक लेन-देन को सुगम और पारदर्शी बनाया है।
प्रमुख संस्थाओं का दृष्टिकोण
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) स्थिर रहती है और मानसून सामान्य रहता है, तो भारत न केवल 7.4% का आंकड़ा छू सकता है, बल्कि इससे बेहतर प्रदर्शन भी कर सकता है।
“भारत का निजी निवेश चक्र अब गति पकड़ रहा है। 7.4% की अनुमानित वृद्धि दर यह दर्शाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्व (Fundamentals) बेहद मज़बूत हैं।” — आर्थिक विश्लेषक
भविष्य की चुनौतियां
हालांकि विकास दर उत्साहजनक है, लेकिन कुछ जोखिमों पर नज़र रखना आवश्यक है:
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कच्चे तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव राजकोषीय गणित को प्रभावित कर सकता है।
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भू-राजनीतिक तनाव: वैश्विक युद्ध और व्यापारिक तनाव निर्यात को प्रभावित कर सकते हैं।
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