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मुक्तसर में गुरुद्वारा साहिब की प्रधानगी पर खूनी जंग: AAP सरपंच समेत 28 पर FIR, 4 को लगी गोली

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चंडीगढ़. पंजाब के मुक्तसर जिले के गिद्दड़बाहा क्षेत्र के अंतर्गत आते गांव भूंदड़ में शुक्रवार को गुरुद्वारा साहिब की प्रधानगी के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। दो पक्षों के बीच हुई इस खूनी झड़प में जमकर गोलीबारी और तेजधार हथियारों का इस्तेमाल हुआ, जिसमें 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) समर्थित सरपंच समेत 18 नामजद और 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

विवाद की जड़: जमीन और गोलक का नियंत्रण

जानकारी के अनुसार, गांव भूंदड़ के ऐतिहासिक गुरुद्वारा बाबा भूंदड़ साहिब की प्रबंधकीय कमेटी को लेकर पिछले कुछ दिनों से तनाव चल रहा था। पूर्व सरपंच सुखदेव सिंह द्वारा दी गई शिकायत के मुताबिक, गुरुद्वारे के पास लगभग 2 एकड़ जमीन है और भारी मात्रा में चढ़ावा आता है। आरोप है कि वर्तमान सरपंच अमनदीप सिंह पुरानी कमेटी को भंग कर जबरन नई कमेटी बनाना चाहते थे।

घटना का विवरण: गुरुद्वारे में तोड़फोड़ और फायरिंग

शुक्रवार सुबह करीब 11:30 बजे सरपंच पक्ष के दर्जनों लोग हथियारों के साथ गुरुद्वारा परिसर में दाखिल हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार:

  • हमलावरों ने सबसे पहले सीसीटीवी कैमरे और गोलक के ताले तोड़ दिए।

  • जब पुरानी कमेटी के सदस्यों ने विरोध किया, तो विवाद बढ़ गया।

  • देखते ही देखते देसी कट्टों और रिवॉल्वर से फायरिंग शुरू हो गई।

  • इस हमले में बलविंदर सिंह और जगदीप सिंह समेत तीन लोगों को गोलियां लगीं, जबकि एक व्यक्ति किरपान के हमले से घायल हुआ।

पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। घायलों को तुरंत सिविल अस्पताल मुक्तसर में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

डीएसपी अरुण मुंडन ने बताया:

“हमने सरपंच अमनदीप सिंह और 17 अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर छापेमारी की जा रही है। इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है।”

फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।

matribhumisamachar.com/category/crime/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।