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सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की मध्यमग्राम में गोली मारकर हत्या: बंगाल में चुनावी जीत के बाद फिर खूनी संघर्ष

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

कोलकाता | गुरुवार, 7 मई 2026 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक नतीजों के बाद राज्य में राजनीतिक हिंसा का तांडव फिर से शुरू हो गया है। बुधवार की रात उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में बीजेपी के कद्दावर नेता और नंदीग्राम से विधायक सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह हमला उस समय हुआ जब बीजेपी राज्य में अपनी बड़ी जीत का जश्न मना रही थी।

घटना का पूरा विवरण: कैसे दिया गया अंजाम?

जानकारी के अनुसार, चंद्रनाथ रथ कोलकाता से अपने घर की ओर लौट रहे थे। वह एक काली स्कॉर्पियो में सवार थे। जैसे ही उनकी गाड़ी मध्यमग्राम के पास जेसोर रोड पर डोलतला इलाके में पहुँची, बाइक सवार हमलावरों ने उन्हें घेर लिया।

  • ताबड़तोड़ फायरिंग: हमलावरों ने कार के अगले हिस्से को निशाना बनाते हुए करीब 8-9 राउंड फायरिंग की।

  • सीधे सिर और सीने पर हमला: हमलावरों ने बेहद करीब (Point-blank range) से गोली चलाई, जिससे चंद्रनाथ के सिर और सीने में गंभीर चोटें आईं।

  • ड्राइवर भी घायल: इस हमले में गाड़ी चला रहे उनके साथी बुद्धदेव बेरा भी घायल हुए हैं, जिन्हें पास के ही विबासिटी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है।

हत्या के पीछे की बड़ी वजह और राजनीतिक आरोप

बीजेपी ने इस हत्या का सीधा आरोप तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर लगाया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि सुवेंदु अधिकारी के करीबियों को निशाना बनाकर पार्टी के मनोबल को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। वहीं, टीएमसी ने इन आरोपों को निराधार बताया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

“यह एक टारगेट किलिंग है। चंद्रनाथ मेरे साथ पिछले कई वर्षों से काम कर रहे थे। राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।” – सुवेंदु अधिकारी

वर्तमान स्थिति और पुलिस कार्रवाई

घटना के बाद से ही कोलकाता और मध्यमग्राम में तनाव का माहौल है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। घटनास्थल से पुलिस ने कुछ खोखे और सबूत भी बरामद किए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।