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उज्जैन में 700 साल पुराना ऐतिहासिक महाकाल द्वार (क्षिप्रा द्वार) ढहा, बड़ा हादसा टला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read
उज्जैन | 
धर्मनगरी उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर से रामघाट की ओर जाने वाले प्राचीन मार्ग पर स्थित लगभग 700 वर्ष पुराना ऐतिहासिक ‘महाकाल द्वार’ (जिसे क्षिप्रा द्वार भी कहा जाता है) देर रात अचानक भरभराकर गिर गया। यह घटना शनिवार-रविवार की मध्यरात्रि को हुई। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय आसपास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

हादसे की वजह और शुरुआती रिपोर्ट

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, महाकाल द्वार के ठीक पास मार्ग चौड़ीकरण व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जेसीबी मशीनों से गहरी खुदाई की जा रही थी। पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश के कारण मिट्टी में नमी बढ़ गई थी, जिससे जमीन धंसने की स्थिति पैदा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि नींव के कमजोर होने और खुदाई के कारण यह 14वीं शताब्दी का ढांचा भार सहन नहीं कर सका।

2.12 करोड़ रुपये की लागत से चल रहा था जीर्णोद्धार

महाकालेश्वर मंदिर से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित यह द्वार बेसाल्ट पत्थरों और प्राचीन ईंटों से निर्मित था। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगभग 2.12 करोड़ रुपये की लागत से इसका संरक्षण कार्य कराया जा रहा था। इसमें आधुनिक सीमेंट की जगह पारंपरिक चूना, गुड़, मेथी और अन्य जड़ी-बूटियों के पारंपरिक मिश्रण का उपयोग किया जा रहा था।

जांच के आदेश और पुनर्निर्माण का संकल्प

घटना के बाद प्रशासनिक व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया। हादसे की वास्तविक वजहों, खुदाई की प्रक्रिया और निर्माण गुणवत्ता की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस धरोहर को उसी पारंपरिक तकनीक और मूल स्वरूप में दोबारा बनाया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: उज्जैन का महाकाल द्वार कितना पुराना था?
A: यह द्वार लगभग 14वीं शताब्दी का माना जाता है, जो करीब 700 साल पुराना ऐतिहासिक ढांचा था।
Q2: महाकाल द्वार गिरने की मुख्य वजह क्या मानी जा रही है?
A: द्वार के पास चल रही गहरी खुदाई और बारिश के कारण मिट्टी में आई नमी व जमीन का धंसना इसके गिरने का मुख्य संभावित कारण माना जा रहा है।
Q3: क्या इस हादसे में कोई जनहानि हुई है?
A: नहीं, घटना देर रात हुई जब वहां कोई मौजूद नहीं था, इसलिए किसी भी प्रकार की जनहानि या चोट की सूचना नहीं है।
Q4: महाकाल द्वार के जीर्णोद्धार बजट कितना था?
A: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत इसके जीर्णोद्धार और संरक्षण पर लगभग 2.12 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत था।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख उपलब्ध प्राथमिक रिपोर्टों और प्रशासनिक जानकारियों पर आधारित है। हादसे के आधिकारिक और तकनीकी कारणों का अंतिम खुलासा जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।