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जिशु सेनगुप्ता बनाम शिबोप्रसाद मुखर्जी! इस पूजा पर शुरू होगा बंगाल का सबसे जबरदस्त आमना-सामना, रिलीज़ हुआ ‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ का ट्रेलर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, अक्टूबर, 2026: जंग अब आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है। ‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ का ट्रेलर रिलीज़ हो गया है, जो अपराध, एक्शन, रोमांचक फरारियों और शिबोप्रसाद मुखर्जी द्वारा निभाए गए कुख्यात गोल्डन डाकू बिक्रम प्रमाणिक तथा उसके पीछे पड़े एक जांबाज़ पुलिस अधिकारी की भूमिका में जिशु सेनगुप्ता के बीच होने वाले जबरदस्त आमने-सामने की झलक पेश करता है।

एक साहसी जेल ब्रेक से लेकर बेखौफ सोने की लूट तक, ट्रेलर दर्शकों को सीधे फिल्म की रोमांच और एड्रेनालिन से भरपूर दुनिया में ले जाता है। बिक्रम एक अनुभवी, अप्रत्याशित और हमेशा एक कदम आगे रहने वाला अपराधी है, वहीं जिशु का पुलिस अधिकारी उसे पकड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। दोनों के बीच होने वाला टकराव फिल्म की सबसे बड़ी खासियतों में से एक होने का वादा करता है।

लेकिन एक्शन और भव्यता के साथ-साथ ‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ की जड़ें बंगाल की मिट्टी से गहराई से जुड़ी हुई हैं। फिल्म एक बार फिर बहुरूपी लोक परंपरा को अपनी कहानी का हिस्सा बनाती है और इस बार मालदा के जीवंत गंभीरा लोक कलाकारों को भी इसमें शामिल किया गया है। उनके पारंपरिक गीत, मुखौटे और प्रस्तुतियां फिल्म की दुनिया में प्रामाणिक सांस्कृतिक रंग भरती हैं और इसकी भव्य कहानी को बंगाल की समृद्ध लोक विरासत से जोड़ती हैं।

फिल्म के बारे में बात करते हुए, शिबोप्रसाद मुखर्जी ने कहा, “बिक्रम प्रमाणिक मेरे द्वारा निभाए गए किरदारों से बिल्कुल अलग है। वह एक अनुभवी डाकू है, बेहद अप्रत्याशित है और अपने बनाए नियमों के अनुसार काम करता है। ट्रेलर में उसकी बेखौफ और साहसी छवि की सिर्फ एक झलक मिलती है, लेकिन उसके किरदार की कई और परतें हैं, जिन्हें दर्शक फिल्म के दौरान जान पाएँगे। जिशु के किरदार के साथ उसका टकराव इस सफर को और भी रोमांचक बनाता है। हमने एक ऐसी दुनिया तैयार की है, जो पैमाने में पहले से कहीं बड़ी है, लेकिन बंगाल की जड़ों से पूरी तरह जुड़ी हुई है। इस पूजा पर दर्शकों को इसे बड़े पर्दे पर देखने का बेसब्री से इंतज़ार है।”

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नंदिता रॉय ने कहा, “बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ के साथ हमारा उद्देश्य पहली फिल्म की दुनिया को और विस्तार देना था, लेकिन साथ ही उस सांस्कृतिक और भावनात्मक आत्मा को बरकरार रखना था, जिससे दर्शक जुड़े थे। मालदा के गंभीरा कलाकार इस सफर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बने। उनके गीत, मुखौटे और प्रस्तुतियाँ फिल्म में ऐसी प्रामाणिकता लेकर आती हैं, जिसे सिर्फ दोहराया या बनाया नहीं जा सकता। इसके साथ ही फिल्म का पैमाना भी काफी बड़ा है, जिसमें एक्शन, सस्पेंस और एक मजबूत भावनात्मक कहानी देखने को मिलेगी। ट्रेलर हमारी बनाई दुनिया की सिर्फ एक झलक है।”

जिशु सेनगुप्ता ने आगे कहा, “मेरा किरदार बिक्रम को पकड़ने के लिए पूरी तरह दृढ़ है और यही तलाश कहानी में तनाव का एक बड़ा कारण बनती है। इन सीक्वेंस में शिबू के साथ काम करना शानदार अनुभव रहा, क्योंकि दोनों किरदारों के बीच लगातार एक जबरदस्त तनाव और तीव्रता देखने को मिलती है। ट्रेलर आपको इस टकराव का सिर्फ एक स्वाद देता है, लेकिन कहानी में अभी बहुत कुछ सामने आना बाकी है। मैं दर्शकों को इस सफर को बड़े पर्दे पर देखने के लिए बेहद उत्साहित हूँ।”

ट्रेलर रिलीज़ विंडोज़ प्रोडक्शन के लिए भी खास महत्व रखता है, क्योंकि प्रोडक्शन हाउस अपनी सिनेमाई यात्रा के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। ढाई दशकों से अधिक समय में इस प्रोडक्शन हाउस ने ऐसी कहानियों के जरिए अपनी एक अलग पहचान बनाई है, जिनमें मजबूत भावनाएँ, जमीन से जुड़े किरदार और थिएटर के लिए मनोरंजन का शानदार मेल देखने को मिलता है। ‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ इस ऐतिहासिक 25वें वर्ष की खास प्रस्तुतियों में से एक है।

विंडोज़ प्रोडक्शन और संजय अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत, इस फिल्म का निर्देशन नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी ने किया है। कहानी भी इसी चर्चित जोड़ी ने लिखी है, जबकि पटकथा नंदिता रॉय की और संवाद शिबोप्रसाद मुखर्जी के हैं।

फिल्म में जिशु सेनगुप्ता, शिबोप्रसाद मुखर्जी, कौशानी मुखर्जी, सोहिनी सरकार और प्रदीप भट्टाचार्य प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएँगे।

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‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ अपराध, एक्शन, भावनाओं, रोमांस और बंगाल की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का दमदार मिश्रण पेश करने का वादा करती है।

‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ 15 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।