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सिद्धार्थनगर में धर्मांतरण का बड़ा खुलासा: ₹3 लाख और पट्टे के लालच में बदला धर्म, मौलवी समेत 3 पर केस

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

लखनऊ | बुधवार, 8 अप्रैल, 2026

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के ढोबही गांव में धर्मांतरण का एक बड़ा मामला गरमाता जा रहा है। पूर्व प्राथमिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी के हस्तक्षेप और पीड़ितों के खुलासे के बाद स्थानीय पुलिस ने इस मामले में कठोर रुख अख्तियार कर लिया है। आरोप है कि आर्थिक रूप से पिछड़े दलित हिंदू परिवारों को सरकारी लाभ और नकदी का झांसा देकर इस्लाम स्वीकार कराया जा रहा है।

कैसे हुआ खुलासा?

मामले का केंद्र रामप्रसाद उर्फ टकालू है, जिसने कथित तौर पर अपनी दो बेटियों के साथ धर्म परिवर्तन कर लिया। रामप्रसाद के भाइयों—बाबूलाल और ओमप्रकाश—ने प्रेस वार्ता कर चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि रामप्रसाद अचानक रमजान के दौरान रोजा रखने और टोपी पहनने लगा था। जब परिवार ने विरोध किया, तो पता चला कि उसे 3 लाख रुपये, पट्टा और आवास दिलाने का लालच दिया गया था।

नामजद आरोपी और पुलिस की जांच

सिद्धार्थनगर पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य किरदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया है:

  1. मौलवी गुलाम हुसैन

  2. पूर्व प्रधान हदीसउल्लाह

  3. फारूक

एसपी डॉ. अभिषेक महाजन ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें भेजी गई हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस धर्मांतरण के पीछे कोई बाहरी या विदेशी फंडिंग का हाथ तो नहीं है।

पूर्व मंत्री की चेतावनी: “सामाजिक सौहार्द पर खतरा”

पूर्व मंत्री सतीश द्विवेदी ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर इस मामले को गंभीरता से लेने को कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने का फायदा उठाकर एक सोची-समझी रणनीति के तहत गरीबों का धर्म बदला जा रहा है। द्विवेदी ने कहा,

“यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित गिरोह सक्रिय है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह पूरे जिले के सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ सकता है।”

यूपी का नया कानून: अब और भी सख्त हुई सजा

उत्तर प्रदेश में विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) अधिनियम के तहत अब नियम पहले से कहीं अधिक कठोर हो चुके हैं। यदि इस मामले में दोष सिद्ध होता है, तो आरोपियों को निम्नलिखित कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है:

  • उम्रकैद का प्रावधान: नए संशोधन के अनुसार, जबरन या लालच देकर धर्मांतरण कराने पर अब आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

  • भारी जुर्माना: दलित या नाबालिग के धर्मांतरण के मामले में ₹1 लाख तक का जुर्माना और कड़ी जेल का प्रावधान है।

  • गैर-जमानती अपराध: यह मामला पूरी तरह से गैर-जमानती है, जिससे आरोपियों की मुश्किलें बढ़नी तय हैं।

वर्तमान स्थिति

फिलहाल ढोबही गांव और आसपास के क्षेत्रों में तनाव को देखते हुए पुलिस मुस्तैद है। प्रशासन ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने और किसी भी बहकावे में न आने की अपील की है। पुलिस की जांच अब इस बात पर टिकी है कि रामप्रसाद के अलावा और कितने परिवार इस गिरोह के निशाने पर थे।

मुख्य बिंदु:

  • आरोप: दलित और गरीब परिवारों को धन, सरकारी आवास और पट्टे का लालच देकर धर्म परिवर्तन।

  • कानूनी कार्रवाई: मौलवी समेत तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज, पुलिस की दबिश जारी।

  • सियासी घमासान: पूर्व मंत्री सतीश द्विवेदी ने इसे ‘संगठित गिरोह’ का काम बताया; निष्पक्ष जांच की मांग।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।