मुंबई। शनिवार, 8 अगस्त 2026
भारत में एआई-जनित भ्रामक जानकारी (AI Misinformation) और डीपफेक कंटेंट के बढ़ते खतरों के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सोशल मीडिया दिग्गज Meta (Facebook, Instagram, WhatsApp) के खिलाफ अपना रुख बेहद सख्त कर दिया है। सरकार ने कंपनी को स्पष्ट हिदायत दी है कि वह प्लेटफॉर्म पर कंटेंट हटाने तक ही सीमित न रहे, बल्कि उन सिफारिशी प्रणालियों (Recommendation Algorithms) में भी बड़े सुधार करे जो हानिकारक और फेक कंटेंट को वायरल करने का काम करती हैं।
एल्गोरिदमिक जवाबदेही पर सरकार का कड़ा रुख
उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मंत्रालय के अधिकारियों ने Meta की मौजूदा कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था और तकनीकी कमियों की गहन समीक्षा की। सरकार का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि जब कोई भ्रामक या हेरफेर किया गया (Manipulated) कंटेंट अपलोड होता है, तो प्लेटफॉर्म के स्वचालित एल्गोरिदम उसकी पहुंच (Reach) को तेजी से बढ़ा देते हैं।
सरकार ने Meta से कहा है कि वह अपने रिकमेंडेशन एल्गोरिदम के डिजाइन में आवश्यक सुरक्षात्मक बदलाव करे, ताकि आपत्तिजनक सामग्री बड़े पैमाने पर यूजर्स के फीड तक न पहुंच सके।
डीपफेक और AI-जनित कंटेंट से निपटने की रणनीति
एआई तकनीक के प्रसार के साथ ही इंटरनेट पर मॉर्फ्ड तस्वीरों और डीपफेक वीडियो की बाढ़ आ गई है। इसे रोकने के लिए सरकार ने Meta को निम्नलिखित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:
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Quick Response Teams (QRTs) से तालमेल: विभिन्न सरकारी विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया टीमों के साथ सीधा समन्वय बनाया जाए ताकि चिन्हित डीपफेक कंटेंट को तुरंत हटाया जा सके।
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प्रोएक्टिव डिटेक्शन: एआई-जनित फर्जी कंटेंट की पहचान करने वाले ऑटोमेटेड डिटेक्शन टूल्स को मजबूत बनाया जाए।
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त्वरित टेकडाउन व्यवस्था: संवेदनशील और गैरकानूनी पोस्ट पर शिकायतों के बाद कार्रवाई का समय घटाया जाए।
डेटा लोकलाइजेशन और भारतीय कानूनों का अनुपालन
बैठक में भारत के डेटा लोकलाइजेशन (Data Localization) नियमों के कड़ाई से पालन पर भी बात हुई। सरकार ने साफ किया कि भारत में काम करने वाले सभी टेक प्लेटफॉर्मों को भारतीय कानूनों के तहत ही कार्य करना होगा। Meta को अपनी मौजूदा प्रणालियों की कमियों को दूर करने के लिए जल्द से जल्द एक विस्तृत Compliance Roadmap और Corrective Action Plan पेश करने के लिए कहा गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. भारत सरकार ने Meta पर कार्रवाई क्यों तेज की है?
प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल रहे डीपफेक, फर्जी खबरों और प्रोपेगैंडा कंटेंट की एल्गोरिदमिक रीच को नियंत्रित करने और डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
2. एल्गोरिदमिक जवाबदेही (Algorithmic Accountability) क्या है?
इसका अर्थ है कि सोशल मीडिया कंपनियां केवल गलत कंटेंट हटाने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने उस कोड/एल्गोरिदम की भी जिम्मेदारी लें जो ऐसे कंटेंट को यूजर्स तक प्रमोट करता है।
3. QRTs (Quick Response Teams) कैसे काम करेंगी?
QRTs सरकारी एजेंसियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बीच समन्वय स्थापित करेंगी, जिससे डीपफेक या भ्रामक पोस्ट मिलते ही उसे तुरंत फ्लैग करके प्लेटफॉर्म से हटाया जा सके।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और Meta के बीच हुई हालिया समीक्षा बैठकों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नीतिगत रिपोर्टों के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है।
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