मंगलवार, जनवरी 20 2026 | 05:11:02 PM
Breaking News
Home / अंतर्राष्ट्रीय / अमेरिकी सीनेट का बड़ा कदम: राष्ट्रपति ट्रंप की युद्ध शक्तियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रस्ताव पेश

अमेरिकी सीनेट का बड़ा कदम: राष्ट्रपति ट्रंप की युद्ध शक्तियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रस्ताव पेश

Follow us on:

वॉशिंगटन. अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिना कांग्रेस (संसद) की अनुमति के सैन्य कार्रवाई करने की शक्तियों को सीमित करने के उद्देश्य से एक द्विदलीय प्रस्ताव को आगे बढ़ाया है। यह कदम वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए किए गए हालिया अमेरिकी सैन्य छापे और वहां संभावित लंबी सैन्य उपस्थिति की चिंताओं के बीच उठाया गया है।

प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:

  • अनिवार्य अनुमति: प्रस्ताव के अनुसार, राष्ट्रपति को वेनेजुएला के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य शत्रुता या युद्ध शुरू करने से पहले कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी लेनी होगी।

  • द्विदलीय समर्थन: सीनेट में इस प्रक्रियात्मक वोट के दौरान 52-47 का बहुमत रहा। खास बात यह रही कि 5 रिपब्लिकन सांसदों (रैंड पॉल, सुसान कोलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की, टॉड यंग और जोश हॉली) ने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट्स का साथ दिया।

  • संविधान का हवाला: सीनेटर टिम केन और रैंड पॉल, जो इस प्रस्ताव के मुख्य प्रायोजक हैं, ने तर्क दिया कि अमेरिकी संविधान के तहत युद्ध की घोषणा करने की शक्ति संसद के पास है, न कि अकेले राष्ट्रपति के पास।

ट्रंप की प्रतिक्रिया और विवाद

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव की तीखी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया (Truth Social) पर इसे “असंवैधानिक” करार दिया और कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रपति की ‘कमांडर-इन-चीफ’ के रूप में कार्य करने की क्षमता को बाधित करता है। ट्रंप ने उन रिपब्लिकन सांसदों को भी निशाने पर लिया जिन्होंने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।

पृष्ठभूमि: वेनेजुएला संकट

यह प्रस्ताव तब आया है जब हाल ही में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में एक साहसिक ऑपरेशन चलाकर मादुरो को हिरासत में लिया है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका “उचित संक्रमण” होने तक वेनेजुएला का प्रबंधन (Run the country) कर सकता है और वहां के तेल संसाधनों पर नियंत्रण रख सकता है। सांसदों को डर है कि यह अमेरिका को एक और लंबे और अनचाहे विदेशी युद्ध में धकेल सकता है।

आगे क्या होगा?

सीनेट में अगले सप्ताह इस पर अंतिम मतदान होने की संभावना है। यदि यह सीनेट से पारित हो जाता है, तो इसे प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में भेजा जाएगा। हालांकि, कानून बनने के लिए इसे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी, जिसे ट्रंप निश्चित रूप से वीटो (Veto) कर देंगे। ऐसे में संसद को इस वीटो को पलटने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जो फिलहाल चुनौतीपूर्ण नजर आता है।

यह रहा अमेरिकी सीनेट के इस प्रस्ताव के संवैधानिक पहलुओं और ‘वॉर पावर्स एक्ट’ पर एक विस्तृत विश्लेषण:

युद्ध शक्तियाँ और अमेरिकी संविधान: एक संवैधानिक संघर्ष

अमेरिकी संविधान में युद्ध करने की शक्ति को लेकर एक अनूठा संतुलन (Checks and Balances) बनाया गया है, जो अक्सर राष्ट्रपति और संसद (कांग्रेस) के बीच विवाद का कारण बनता है:

संविधान क्या कहता है?

अनुच्छेद 1, धारा 8 (Article 1, Section 8): यह स्पष्ट रूप से कांग्रेस को “युद्ध की घोषणा करने” (To declare war) की शक्ति देता है।

अनुच्छेद 2, धारा 2 (Article 2, Section 2): यह राष्ट्रपति को अमेरिकी सेना के “कमांडर-इन-चीफ” (Commander-in-Chief) के रूप में नामित करता है।

विवाद का कारण: राष्ट्रपति का तर्क होता है कि देश की रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई करना उनका अधिकार है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि बिना उनकी अनुमति के किसी भी लंबे सैन्य संघर्ष में देश को नहीं धकेला जा सकता।

वॉर पावर्स एक्ट, 1973 (War Powers Resolution)

यह कानून वियतनाम युद्ध के दौरान पारित किया गया था ताकि राष्ट्रपति की शक्तियों पर लगाम लगाई जा सके। इसके मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:

परामर्श: राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले, जहाँ तक संभव हो, कांग्रेस से परामर्श करना चाहिए।

रिपोर्टिंग: सेना भेजने के 48 घंटों के भीतर राष्ट्रपति को लिखित में इसकी सूचना कांग्रेस को देनी होगी।

60 दिनों की समय सीमा: यदि कांग्रेस 60 दिनों के भीतर युद्ध की घोषणा नहीं करती या सैन्य कार्रवाई को अधिकृत नहीं करती, तो राष्ट्रपति को सेना वापस बुलानी होगी (30 अतिरिक्त दिन वापसी के लिए मिलते हैं)।

वर्तमान प्रस्ताव का महत्व

सीनेट में पेश किया गया हालिया प्रस्ताव इसी 1973 के कानून का उपयोग करता है। यह विशेष रूप से वेनेजुएला के संदर्भ में लाया गया है क्योंकि:

संवैधानिक मर्यादा: सांसदों का तर्क है कि वेनेजुएला में मादुरो को पकड़ने के बाद वहां अमेरिकी सेना का बने रहना एक “युद्ध” की स्थिति है, जिसके लिए राष्ट्रपति ने संसद से अनुमति नहीं ली है।

अधिकार क्षेत्र: यह प्रस्ताव राष्ट्रपति को निर्देशित करता है कि वे 30 दिनों के भीतर वेनेजुएला से अमेरिकी सेना को हटा लें, जब तक कि कांग्रेस युद्ध की औपचारिक घोषणा न कर दे।

वीटो (Veto) की शक्ति और आगे की राह

चूँकि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ‘असंवैधानिक’ बताया है, इसलिए प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी:

  • राष्ट्रपति का वीटो: राष्ट्रपति इस बिल पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर सकते हैं।

  • वीटो ओवरराइड: यदि राष्ट्रपति वीटो करते हैं, तो संसद को इसे कानून बनाने के लिए दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होगी। वर्तमान राजनीतिक स्थिति में, रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाली सीनेट में दो-तिहाई वोट जुटाना डेमोक्रेट्स के लिए बहुत कठिन होगा।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

ईरान में गृहयुद्ध जैसे हालात: 15,000 से ज्यादा की मौत, भारत ने शुरू किया ‘ऑपरेशन स्वदेश’; जानें लेटेस्ट अपडेट

तेहरान. ईरान इस समय अपने आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े जन-आक्रोश और गृहयुद्ध जैसी स्थिति …