लोड हो रहा है...

ईरान के निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी का मार-ए-लागो दौरा संभव, पर ट्रंप से मुलाकात पर सस्पेंस

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

वॉशिंगटन. ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी अगले सप्ताह फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो का दौरा कर सकते हैं। वे वहां ‘यरूशलेम प्रेयर ब्रेकफास्ट’ (Jerusalem Prayer Breakfast) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए जा रहे हैं। हालांकि, इस दौरे में सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि क्या उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होगी या नहीं।

ट्रंप ने मुलाकात को बताया “अनुचित”

फिलहाल, राष्ट्रपति ट्रंप ने पहलवी के साथ किसी भी औपचारिक बैठक की पुष्टि नहीं की है। हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस समय प्रिंस पहलवी से मिलना “उचित” (appropriate) नहीं होगा। राष्ट्रपति का यह रुख दर्शाता है कि अमेरिका ईरान के भविष्य को लेकर बेहद सतर्क रुख अपना रहा है।

उत्तराधिकारी पर ‘वेट एंड वॉच’ की नीति

ट्रंप प्रशासन के संकेतों के अनुसार, अमेरिका फिलहाल ईरान में किसी विशेष उत्तराधिकारी या नेता का समर्थन करने की जल्दबाजी में नहीं है। ट्रंप ने संकेत दिया कि वे यह देखना चाहते हैं कि ईरान में जारी व्यापक सरकार विरोधी प्रदर्शनों और जन-आंदोलन से कौन सा नेतृत्व उभरकर सामने आता है। यह रणनीतिक रुख दर्शाता है कि अमेरिका भविष्य के राजनीतिक बदलाव का फैसला ईरान की जनता पर ही छोड़ना चाहता है।

ईरान में गहराता संकट और पहलवी की भूमिका

यह संभावित दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान भीषण आर्थिक संकट और बड़े पैमाने पर हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जूझ रहा है।

  • पहलवी का समर्थन: प्रिंस रजा पहलवी ने लगातार इन प्रदर्शनों का समर्थन किया है और ईरान में लोकतांत्रिक बदलाव की वकालत की है।

  • ट्रंप की चेतावनी: राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ईरानी सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों पर किसी भी तरह की हिंसक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • आभार व्यक्त किया: पहलवी ने ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खड़े होने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का आभार भी व्यक्त किया है।

निष्कर्ष

हालांकि प्रिंस पहलवी और ट्रंप दोनों ही वर्तमान ईरानी शासन के मुखर आलोचक हैं, लेकिन एक औपचारिक मुलाकात का न होना यह संकेत देता है कि कूटनीतिक गलियारों में अभी कई समीकरणों पर विचार किया जाना बाकी है। दुनिया की नजरें अब अगले हफ्ते मार-ए-लागो में होने वाले घटनाक्रमों पर टिकी हैं।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।