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दिल्ली में 10 अक्टूबर को CJP प्रदर्शन पर कड़े सुरक्षा प्रबंध: सुप्रीम कोर्ट ने कहा– “मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल न करें”

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

नई दिल्ली।

नई दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) प्रदर्शन को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। प्रदर्शन के कारण रेल, मेट्रो यातायात और इंटरनेट सेवाओं में बड़े पैमाने पर पाबंदियां लगाई गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को कड़ा संदेश दिया है कि सुरक्षा के नाम पर आम जनता की आवाजाही पूरी तरह बाधित नहीं की जानी चाहिए।

 

245 ट्रेनें प्रभावित: कानपुर और प्रयागराज मार्ग के यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

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सुरक्षा व्यवस्था और नई दिल्ली तथा हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों के आसपास ट्रैफिक जाम की संभावना को देखते हुए रेलवे ने 245 ट्रेनों के संचालन को प्रभावित किया है।

  • समय सीमा: 10 अक्टूबर को सुबह 4:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक दिल्ली पहुंचने वाली प्रमुख ट्रेनों पर इसका सीधा असर पड़ा है।
  • प्रभावित प्रमुख ट्रेनें: राजधानी एक्सप्रेस, तेजस राजधानी, शताब्दी, हमसफर और संपर्क क्रांति जैसी प्रीमियम सेवाएं शामिल हैं।
  • उत्तर प्रदेश के मुख्य रूट: कानपुर सेंट्रल–नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस (12033), कानपुर सेंट्रल–नई दिल्ली श्रमशक्ति एक्सप्रेस (12451) और प्रयागराज–नई दिल्ली प्रयागराज एक्सप्रेस समेत कई सेवाएं प्रभावित हैं।

यात्रियों के लिए सलाह: कानपुर, प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी से दिल्ली जाने वाले यात्री स्टेशन निकलने से पूर्व राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली (NTES) पर लाइव ट्रेन रनिंग स्टेटस अवश्य जांच लें।

 

दिल्ली मेट्रो के 45 से 57 स्टेशनों पर पाबंदी

प्रदर्शन को मध्य दिल्ली की ओर बढ़ने से रोकने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने पुलिस दिशा-निर्देशों के आधार पर मेट्रो संचालन में कई बदलाव किए हैं।

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  1. स्टेशनों पर प्रतिबंध: राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक, नई दिल्ली, मंडी हाउस, आईटीओ, खान मार्केट और जनपथ समेत 45 से 57 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद या नियंत्रित किए गए हैं।
  2. इंटरचेंज सुविधा: यात्रियों की सुविधा के लिए अधिकांश स्टेशनों पर इंटरचेंज की अनुमति दी गई है, हालांकि नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर इंटरचेंज को सीमित रखा गया है।

 

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: अनुपातिकता का सिद्धांत जरूरी

सार्वजनिक परिवहन बंद करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट पीठ ने कहा कि सुरक्षा और जन-सुविधा के बीच संतुलन होना चाहिए।

  • मक्खी मारने के लिए हथौड़ा न चलाएं: पीठ ने टिप्पणी की कि “अनुपात का सिद्धांत (Principle of Proportionality) का पालन होना चाहिए। किसी प्रदर्शन को रोकने के लिए मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।”
  • मेट्रो सेवा रोकने पर रोक: अदालत ने निर्देश दिया कि मेट्रो सेवाओं का पूर्ण बंद होना स्वीकार्य नहीं है।
  • आम नागरिकों का ध्यान रखा जाए: कोर्ट ने कहा कि दैनिक मजदूरी करने वालों, छात्रों, कर्मचारियों और बुजुर्गों को आवागमन में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।

 

4 किलोमीटर दायरे में मोबाइल इंटरनेट पर रोक

प्रशासन ने सुरक्षा के एहतियाती उपाय के रूप में सेंट्रल दिल्ली के निर्दिष्ट क्षेत्रों (जनपथ-कर्तव्य पथ के आसपास) में 9 अक्टूबर रात 10:00 बजे से 10 अक्टूबर रात 10:00 बजे तक (24 घंटे) मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया है।

 

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1: 10 अक्टूबर को दिल्ली की कौन–कौन सी ट्रेनें रद्द या प्रभावित हैं?

A1: नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन पहुंचने वाली लगभग 245 ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। इसमें कानपुर शताब्दी, श्रमशक्ति एक्सप्रेस, प्रयागराज एक्सप्रेस और हमसफर एक्सप्रेस शामिल हैं।

Q2: क्या दिल्ली मेट्रो 10 अक्टूबर को पूरी तरह से बंद रहेगी?

A2: नहीं, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार मेट्रो का पूर्ण ब्लैकआउट नहीं है। राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय जैसे 45-57 संवेदनशील स्टेशनों के एंट्री/एग्जिट गेट बंद या नियंत्रित किए गए हैं।

Q3: सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा प्रतिबंधों पर क्या आदेश दिया है?

A3: सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन से मेट्रो और ट्रेनों को विनियमित (regulated) तरीके से चलाने और जनता को परेशानी से बचाने के लिए तुरंत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करने का निर्देश दिया है।

 

Disclaimer

यह समाचार लेख उपलब्ध प्राथमिक रिपोर्टों और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित है। ट्रेन और मेट्रो सेवाओं का रियल–टाइम स्टेटस परिवर्तनशील हो सकता है। यात्रा शुरू करने से पहले संबंधित आधिकारिक वेबसाइट्स (IRCTC, DMRC) से जानकारी सत्यापित करें।

 

संबंधित संदर्भ व आधिकारिक स्रोत:

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।