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बॉक्स ऑफिस धमाका: ‘द राजा साब’ की ग्रैंड ओपनिंग, पर ‘धुरंधर’ का ऐतिहासिक राज बरकरार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई: शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को भारतीय सिनेमाघरों में एक तरफ जहाँ दक्षिण भारतीय सुपरस्टार प्रभास की नई फिल्म का जादू सिर चढ़कर बोला, वहीं दूसरी ओर रणवीर सिंह की फिल्म ने इतिहास रचते हुए बॉक्स ऑफिस के पुराने सभी कीर्तिमानों को ध्वस्त कर दिया है।

‘द राजा साब’: प्रभास का फैंटेसी अवतार, मिली धमाकेदार शुरुआत

प्रभास की बहुप्रतीक्षित फैंटेसी हॉरर-कॉमेडी ‘द राजा साब’ ने शुक्रवार को सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है। फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज देखा गया, जिसका असर इसके पहले दिन के कलेक्शन पर साफ नजर आ रहा है।

  • बंपर ओपनिंग: फिल्म ने देश भर में सभी भाषाओं को मिलाकर लगभग ₹45-50 करोड़ की शानदार ओपनिंग की है।

  • हिंदी मार्केट की स्थिति: दक्षिण भारत के मुकाबले हिंदी बेल्ट में फिल्म की शुरुआत अभी थोड़ी धीमी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंदी मार्केट में फिल्म की ऑक्युपेंसी लगभग 15.63% दर्ज की गई है। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि वीकेंड पर इसमें बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

‘धुरंधर’: रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, बनी सबसे बड़ी हिंदी फिल्म

रणवीर सिंह स्टारर ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस पर एक अजेय योद्धा की तरह टिकी हुई है। फिल्म अपनी रिलीज के 35वें दिन (5वें शुक्रवार) भी नए रिकॉर्ड बना रही है।

  • ऐतिहासिक रिकॉर्ड: ‘धुरंधर’ ने भारत में ₹831.40 करोड़ का नेट कलेक्शन कर लिया है। इसके साथ ही इसने ‘पुष्पा 2’ (हिंदी) के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए सबसे बड़ी भारतीय हिंदी फिल्म होने का गौरव हासिल कर लिया है।

  • स्थिर कमाई: नई फिल्मों के आने के बावजूद, फिल्म ने शुक्रवार को ₹4-5 करोड़ का कलेक्शन किया, जो इसकी अविश्वसनीय पकड़ को दर्शाता है।

‘इक्कीस’: दूसरे शुक्रवार को कलेक्शन में भारी गिरावट

श्रीराम राघवन के निर्देशन और अगस्त्य नंदा के अभिनय से सजी फिल्म ‘इक्कीस’ के लिए दूसरा हफ्ता मुश्किल भरा साबित हो रहा है। बड़े बजट की फिल्मों और पुरानी फिल्मों की मजबूती के बीच यह फिल्म संघर्ष करती दिख रही है।

  • शुक्रवार की कमाई: फिल्म के कलेक्शन में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। 9 जनवरी (शुक्रवार) को फिल्म ने केवल ₹85 लाख का कारोबार किया।

  • कुल कमाई: फिल्म ने अब तक भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 9 दिनों में कुल ₹26.35 करोड़ जमा किए हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।