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सैन जोस: अमेरिकी दूतावास के बाहर विरोध की लहर; “ट्रंप, लैटिन अमेरिका छोड़ो” के लगे नारे

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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सैन जोस. कोस्टा रिका की राजधानी सैन जोस में अमेरिकी प्रशासन की हालिया विदेश नीतियों, विशेष रूप से वेनेज़ुएला में सैन्य हस्तक्षेप के विरोध में प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। कोस्टा रिका की राजधानी सैन जोस में स्थित अमेरिकी दूतावास एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन गया है। शनिवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दूतावास के बाहर जमा हुए और वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन का मुख्य कारण

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अमेरिका लैटिन अमेरिकी देशों की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ कर रहा है। हाल ही में वेनेज़ुएला में हुई अमेरिकी कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की हिरासत के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर “ट्रंप, लैटिन अमेरिका छोड़ो” और “साम्राज्यवाद वापस जाओ” जैसे कड़े संदेश लिखे थे।

दूतावास ने जारी किया अलर्ट

बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिकी दूतावास ने पहले ही एक सुरक्षा अलर्ट जारी किया था। दूतावास ने अमेरिकी नागरिकों और कर्मचारियों को निम्नलिखित सलाह दी है:

  • पावास (Pavas) क्षेत्र और दूतावास के आसपास जाने से बचें।

  • स्थानीय मीडिया के माध्यम से अपडेट रहें।

  • भीड़भाड़ वाले इलाकों में सतर्कता बरतें।

विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला

यह पहली बार नहीं है जब इस वर्ष दूतावास को विरोध का सामना करना पड़ा है। इससे पहले 4 जनवरी, 2026 को भी वेनेज़ुएला के प्रवासियों और स्थानीय समर्थकों ने एक बड़ी रैली निकाली थी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वेनेज़ुएला के खिलाफ अमेरिका की “एकतरफा कार्रवाई” अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।

लैटिन अमेरिका में व्यापक आक्रोश

कोस्टा रिका में हो रहे ये प्रदर्शन कोई अकेली घटना नहीं हैं। इसी तरह के उग्र प्रदर्शन अन्य पड़ोसी देशों में भी देखे जा रहे हैं:

  • मेक्सिको: मेक्सिको सिटी में अमेरिकी दूतावास के बाहर भारी प्रदर्शन हुए।

  • कोलंबिया: बोगोटा में हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर अमेरिकी हस्तक्षेप की निंदा की।

महत्वपूर्ण जानकारी: कोस्टा रिका के कानून के अनुसार, विदेशियों को राजनीतिक प्रदर्शनों में भाग लेने की अनुमति नहीं है, इसलिए प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और स्थानीय कानूनों का पालन करने की अपील की है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।