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“जो किस्मत में है, वो कोई छीन नहीं सकता”: टी20 वर्ल्ड कप टीम से बाहर होने पर शुभमन गिल का बड़ा बयान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते हुए सितारे शुभमन गिल ने आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2024 (जो जून में आयोजित होने वाला है) के लिए चुनी गई मुख्य 15 सदस्यीय टीम में जगह न मिलने पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। चयनकर्ताओं ने गिल को मुख्य टीम के बजाय ‘रिजर्व खिलाड़ियों’ की सूची में रखा है। हाल ही में शुभमन गिल ने अपने सोशल मीडिया और इंटरव्यू के दौरान एक खास संदेश साझा किया है, जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है। टी20 वर्ल्ड कप की मुख्य टीम में जगह न मिलने पर उनके इस बयान को उनकी परिपक्वता और सकारात्मक सोच के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

भारतीय टीम के चयन के बाद से ही इस बात पर चर्चा तेज थी कि यशस्वी जायसवाल और रोहित शर्मा की मौजूदगी के कारण गिल को मुख्य टीम से बाहर रहना पड़ा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गिल ने दर्शनशास्त्र (Philosophy) का सहारा लिया और कहा कि वह अपनी मेहनत पर विश्वास रखते हैं, लेकिन जो भाग्य में लिखा है उसे बदला नहीं जा सकता।

गिल ने ऐसा क्यों कहा? इसके पीछे के 3 मुख्य कारण:

  • सकारात्मक मानसिकता (Positive Mindset): गिल ने यह बयान अपनी निराशा को छुपाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को मानसिक रूप से मजबूत रखने के लिए दिया है। वह यह संदेश देना चाहते हैं कि खेल में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और वह इसे एक सीख के रूप में देख रहे हैं।

  • चयन प्रक्रिया का सम्मान: उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से टीम प्रबंधन के फैसले का सम्मान किया है। उनका मानना है कि अगर वह इस बार टीम का हिस्सा नहीं हैं, तो भविष्य में उनके लिए और भी बड़े मौके आएंगे।

  • अनुशासन और धैर्य: गिल ने पिछले कुछ सालों में तीनों फॉर्मेट में शानदार प्रदर्शन किया है। इस बयान के जरिए उन्होंने अपने प्रशंसकों को भरोसा दिलाया है कि वह हार नहीं मानेंगे और अपनी बारी का इंतजार करेंगे।

रिजर्व खिलाड़ी के तौर पर भूमिका

भले ही गिल मुख्य 15 खिलाड़ियों में नहीं हैं, लेकिन वह टीम के साथ अमेरिका और वेस्टइंडीज की यात्रा करेंगे। यदि मुख्य टीम का कोई खिलाड़ी चोटिल होता है, तो गिल को तुरंत प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जा सकता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।