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तालिबान का पाकिस्तान पर सीधा प्रहार: मुत्तकी बोले- ‘अपनी नाकामी छिपाने के लिए शांति को दांव पर लगा रहे पाक जनरल’

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

काबुल. अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक दरार अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गई है। तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी (Amir Khan Muttaqi) ने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि पाकिस्तान के जनरल अपनी घरेलू विफलताओं को छिपाने के लिए पूरे दक्षिण एशिया की शांति को दांव पर लगा रहे हैं।

काले बादलों की तरह मंडराते इस तनाव ने न केवल सीमावर्ती व्यापार को ठप कर दिया है, बल्कि एक बड़े मानवीय संकट की आहट भी दे दी है।

पाकिस्तानी जनरलों और राजनीतिक नेतृत्व के बीच टकराव

काबुल में एक इफ्तार कार्यक्रम के दौरान मुत्तकी ने पाकिस्तानी सेना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

“पाकिस्तान की सेना अपने ही देश के सांसदों, धार्मिक गुरुओं और राजनीतिक नेताओं के साथ संघर्ष में उलझी हुई है। वे समस्याओं का समाधान संवाद के बजाय ‘दबाव की नीति’ से करना चाहते हैं, जो पूरी तरह विफल साबित हो रही है।”

मुत्तकी का यह बयान सीधे तौर पर पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में सेना के हस्तक्षेप और वहां बढ़ती अस्थिरता की ओर इशारा करता है।

TTP विवाद: ‘हमारी जमीन नहीं, आपकी नीति जिम्मेदार’

पाकिस्तान लंबे समय से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को लेकर अफगानिस्तान पर आरोप लगाता रहा है। हालांकि, मुत्तकी ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए ‘पलटवार’ किया:

  1. ऐतिहासिक साक्ष्य: टीटीपी कोई नया संगठन नहीं है; यह तब भी सक्रिय था जब अफगानिस्तान में वर्तमान सरकार अस्तित्व में नहीं थी।

  2. आंतरिक विफलता: अफगान नेतृत्व का तर्क है कि पाकिस्तान अपनी सीमा सुरक्षा और आंतरिक खुफिया तंत्र की विफलता का ठीकरा काबुल पर फोड़ रहा है।

  3. संप्रभुता का सम्मान: मुत्तकी ने स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और अपनी संप्रभुता के लिए हर बलिदान देने को तैयार है।

फरवरी 2026 के हवाई हमले और सीमा पर बढ़ता सैन्य तनाव

दोनों देशों के बीच संबंध तब सबसे निचले स्तर पर चले गए जब फरवरी 2026 में पाकिस्तान ने पूर्वी अफगानिस्तान के क्षेत्रों में हवाई हमले किए। पाकिस्तान का दावा था कि ये हमले टीटीपी के ठिकानों पर थे, लेकिन अफगान अधिकारियों ने इसे नागरिक ठिकानों पर हमला करार दिया।

तोरखम सीमा: राख में तब्दील हुआ व्यापारिक केंद्र

हाल ही में तोरखम बॉर्डर क्रॉसिंग (Torkham Border) के पास हुई गोलाबारी ने आर्थिक कमर तोड़ दी है।

  • नुकसान: एक प्रमुख व्यावसायिक बाजार में आग लगने से लगभग 150 दुकानें जल गईं।

  • वित्तीय चोट: व्यापारियों को करीब 30 करोड़ अफगानी मुद्रा का भारी नुकसान हुआ है।

  • प्रभाव: यह सीमा व्यापार का मुख्य धमनी मार्ग है, जिसके बंद होने से खाने-पीने की वस्तुओं की किल्लत बढ़ गई है।

शरणार्थी संकट और मानवीय दृष्टिकोण

विदेश मंत्री मुत्तकी ने पाकिस्तान द्वारा अफगान शरणार्थियों के साथ किए जा रहे व्यवहार को “अमानवीय” बताया। पाकिस्तान ने हाल के महीनों में हजारों अफगानों को जबरन डिपोर्ट किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि शरणार्थियों का यह मुद्दा और व्यापारिक मार्गों की बार-बार बंदी दोनों देशों के बीच नफरत की खाई को और चौड़ा कर रही है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह तनाव और बढ़ता है तो इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं:

  • दक्षिण एशिया की अस्थिरता: भारत, चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ होने वाला व्यापार प्रभावित होगा।

  • आतंकवाद का उभार: सीमा पर अस्थिरता का फायदा उठाकर चरमपंथी गुट अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं।

  • आर्थिक मंदी: दोनों देशों की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्थाएं इस युद्ध जैसे माहौल को सहन नहीं कर पाएंगी।

क्या युद्ध ही एकमात्र विकल्प है?

अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। मुत्तकी के कड़े रुख से साफ है कि अफगानिस्तान अब रक्षात्मक के बजाय आक्रामक कूटनीति अपना रहा है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि रावलपिंडी (पाक सेना मुख्यालय) और काबुल के बीच की यह जंग मेज पर सुलझेगी या सीमा पर गोलियों से।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।