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1993 मुंबई ब्लास्ट केस: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की गैंगस्टर अबू सलेम की याचिका, 2030 से पहले नहीं होगी रिहाई

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली । 
1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों और 1995 के बिल्डर प्रदीप जैन हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे अंडरवर्ल्ड गैंगस्टर अबू सलेम को सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) से बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सलेम की उस याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें उसने जेल की 25 साल की अवधि पूरी होने का दावा करते हुए तत्काल रिहाई की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें सलेम की इस मांग को “समयपूर्व और गलत” (Premature and Misconceived) बताया गया था।

25 साल की जेल अवधि और विवाद की मुख्य वजह

अबू सलेम की कानूनी टीम का मुख्य तर्क भारत सरकार द्वारा पुर्तगाल सरकार को दिए गए संप्रभु आश्वासन (Sovereign Assurance) पर आधारित था।
  1. पुर्तगाल प्रत्यर्पण शर्त (2002): वर्ष 2002 में जब सलेम को पुर्तगाल से भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तब भारत सरकार ने आश्वासन दिया था कि सलेम को न तो फांसी की सजा दी जाएगी और न ही 25 साल से अधिक जेल में रखा जाएगा।
  2. सलेम का दावा: सलेम की दलील थी कि उसकी अंडरट्रायल (सुनवाई के दौरान) हिरासत, पुर्तगाल में बिताए गए समय और अच्छे आचरण के कारण मिली सामान्य जेल छूट (Remission) को जोड़कर उसकी 25 साल की जेल अवधि पूरी हो चुकी है।

अदालत का फैसला: रिमिशन के आधार पर समय कम नहीं होगा

बॉम्बे हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट दोनों ने सलेम के इन तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया:
  • सजा की गणना की तारीख: सलेम को oficialmente 11 नवंबर 2005 को भारत लाया गया था। इसलिए 25 साल की सीमा की गणना 11 नवंबर 2005 से ही की जाएगी।
  • सामान्य रिमिशन लागू नहीं: 25 साल की अधिकतम सीमा अपने आप में एक विशेष रियायत (सॉवरेन कमिटमेंट) है। इस पर सामान्य जेल नियमों के तहत मिलने वाली ‘रिमिशन’ (Remission) को लागू करके समय सीमा को और छोटा नहीं किया जा सकता।
अदालत का रुख: “साधारण गणना के अनुसार भी 11 नवंबर 2005 से 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी, उससे पहले समय से पहले रिहाई का दावा कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है।”

आपराधिक पृष्ठभूमि और सजा

मामला / घटनासजा / कानूनी स्थिति
1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट257 लोगों की मौत; हथियारों की आपूर्ति के आरोप में TADA कोर्ट द्वारा 2017 में उम्रकैद की सजा।
1995 प्रदीप जैन हत्यामुंबई के मशहूर बिल्डर की हत्या के मामले में 2015 में उम्रकैद।
प्रत्यर्पण (Extradition)11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल (लिस्बन) से भारत लाया गया।
प्रस्तावित रिहाई तिथिनवंबर 2030 (प्रत्यर्पण शर्तों के अनुसार 25 वर्ष पूर्ण होने पर)।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद गैंगस्टर अबू सलेम की तत्काल रिहाई के सभी दरवाजे फिलहाल बंद हो गए हैं। अदालत ने यह साफ कर दिया है कि नवंबर 2030 में 25 साल की अवधि पूरी होने के बाद ही वह कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार अपनी रिहाई का आवेदन दे सकेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: क्या अबू सलेम को 1993 मुंबई ब्लास्ट केस में फांसी दी जा सकती है?
उत्तर: नहीं, भारत सरकार ने 2002 में पुर्तगाल सरकार को यह संप्रभु आश्वासन दिया था कि प्रत्यर्पण के बाद अबू सलेम को न तो मृत्युदंड दिया जाएगा और न ही 25 साल से अधिक की जेल होगी।
Q2: अबू सलेम जेल से कब बाहर आ सकता है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसलों के अनुसार, 11 नवंबर 2005 से शुरू हुई 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी। इसके बाद ही वह रिहाई का हकदार होगा।
Q3: सुप्रीम कोर्ट ने सलेम की अर्जी क्यों खारिज की?
उत्तर: सलेम का कहना था कि जेल रिमिशन और अंडरट्रायल अवधि मिलाकर उसकी 25 साल की सजा पूरी हो गई है। कोर्ट ने कहा कि 25 साल का कैप ही अपने आप में एक बड़ी रियायत है और इसमें सामान्य रिमिशन का लाभ देकर सजा और कम नहीं की जा सकती।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कानूनी दस्तावेजों, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों एवं समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।