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पाकिस्तान से भारतीय SIM कार्ड पर संचालित WhatsApp गिरोह पर NIA की बड़ी कार्रवाई: 400 नंबर और पश्चिम बंगाल लिंक की पड़ताल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

नई दिल्ली।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भारत की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक गंभीर और संवेदनशील मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। पाकिस्तान से भारतीय मोबाइल नंबरों का उपयोग कर WhatsApp अकाउंट संचालित किए जाने के मामले में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। जांच एजेंसियों का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि कैसे भारतीय SIM कार्डों को छल-कपट से सक्रिय (Activate) कराया गया और उनके OTP का इस्तेमाल करके सरहद पार पाकिस्तान से WhatsApp खातों को नियंत्रित किया जा रहा था।

 

पश्चिम बंगाल से जुड़े संदिग्ध तार और लोकल नेटवर्क

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जांच की शुरुआती कड़ी में पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों से जुड़े संदिग्ध गिरोह की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि स्थानीय एजेंटों और मध्यस्थों की मदद से फर्जी दस्तावेजों या धोखे से भारतीय SIM कार्ड हासिल किए गए।

  • SIM सक्रियण और OTP साझा करना: स्थानीय मददगारों ने पहले भारतीय नंबरों पर SIM सक्रिय कराए और फिर उनके वेरिफिकेशन OTP पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को उपलब्ध कराए।
  • संदिग्धों पर शिकंजा: इस नेटवर्क में पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर और मुर्शिदाबाद जिलों से जुड़े संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है।

 

400 से अधिक SIM कार्ड जांच के दायरे में

केंद्रीय जांच एजेंसियों की रडार पर करीब 400 भारतीय SIM कार्ड हैं, जिनका उपयोग इस संदिग्ध प्रक्रिया के तहत किया गया है।

  1. प्राप्ति का जरिया: एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि इतनी बड़ी संख्या में SIM कार्ड किन डीलरों या प्वाइंट-ऑफ-सेल से जारी किए गए।
  2. डेटा शेयरिंग नेटवर्क: SIM के सक्रिय होते ही OTP और अन्य तकनीकी सत्यापन जानकारी किसे और किस माध्यम से भेजी गई।
  3. वित्तीय लेन–देन: क्या इस फर्जीवाड़े और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों को सीमा पार से कोई आर्थिक लाभ पहुंचाया जा रहा था।

 

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सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय

भारतीय मोबाइल नंबरों का विदेश (विशेषकर पाकिस्तान) से संचालन होना राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद खतरनाक है।

  • विश्वास का फायदा: भारतीय (+91) नंबर का इस्तेमाल होने के कारण पीड़ित या लक्षित व्यक्ति इसे सामान्य भारतीय नागरिक का नंबर समझकर बातचीत करने लगता है।
  • संवेदनशील समूहों तक पहुंच: ऐसे नंबरों का प्रयोग गोपनीय सैन्य या प्रशासनिक जानकारी जुटाने, जासूसी करने और संवेदनशील WhatsApp ग्रुपों में घुसपैठ के लिए किए जाने की आशंका रहती है।

 

नियम और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

इस घटनाक्रम के बाद भारत सरकार ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स और डिजिटल संचार प्रदाताओं के लिए सत्यापन (KYC) नियमों को और सख्त करने के निर्देश दिए हैं।

  • बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन: SIM जारी करने के दौरान बायोमेट्रिक और आधार आधारित सत्यापन को अधिक पारदर्शी बनाना।
  • संदेहास्पद ऐप एक्टिवेशन पर रोक: एक ही लोकेशन से फर्जी तरीके से OTP जनरेट कर विदेशी IP एड्रेस पर ऐप चलाने वाले खातों पर रियल-टाइम निगरानी।

 

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1: NIA इस मामले की जांच क्यों कर रही है?

Ans: भारतीय SIM कार्डों को सक्रिय कर उनके OTP पाकिस्तान भेजकर वहां से WhatsApp संचालित करने का मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और जासूसी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है, इसलिए केंद्रीय एजेंसी NIA इसकी जांच कर रही है।

Q2: इस मामले में कितने SIM कार्ड जांच के दायरे में हैं?

Ans: जांच एजेंसियों के अनुसार, लगभग 400 भारतीय SIM कार्डों के संदिग्ध उपयोग और फर्जी सक्रियण की जांच की जा रही है।

Q3: अपने नाम पर जारी SIM कार्ड का दुरुपयोग रोकने के लिए नागरिक क्या करें?

Ans: किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ अपना OTP साझा न करें। समय-समय पर दूरसंचार विभाग के TAFCOP पोर्टल पर जाकर जांचें कि आपके आधार या नाम पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं।

 

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Disclaimer:

यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार रिपोर्ट्स और प्राथमिक जांच की जानकारियों पर आधारित है। मामले में लगाए गए आरोप फिलहाल जांच का हिस्सा हैं और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।