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Tarang Shakti 2026: बदलती वैश्विक सुरक्षा और आधुनिक युद्ध का नया स्वरूप—राजनाथ सिंह का बड़ा संदेश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली।

बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास Tarang Shakti 2026 के समापन अवसर पर जोधपुर वायुसेना स्टेशन पहुँचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आधुनिक युद्ध नीति और बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर एक दूरदर्शी संबोधन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 21वीं सदी के युद्धक्षेत्र में जीत अब केवल पारंपरिक हथियारों की संख्या से तय नहीं होती, बल्कि सूचना के त्वरित विश्लेषण, निर्णय लेने की गति (Speed) और सटीक निशाने (Precision) पर निर्भर करती है।

आधुनिक युद्ध का बदलता दायरा: जमीन से डिजिटल स्पेक्ट्रम तक

रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध अब केवल सीमाओं, जलक्षेत्र और वायुमंडल तक सीमित नहीं रह गया है।

  • नए युद्धक्षेत्र: अंतरिक्ष (Space), साइबर स्पेस (Cyber Space), इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रम और डिजिटल सूचना क्षेत्र सैन्य अभियानों के अभिन्न अंग बन चुके हैं।
  • तकनीकी परिवर्तन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मानवरहित प्रणाली (Unmanned Systems/Drones), इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और लॉन्ग-रेंज प्रिसीजन वेपन्स आधुनिक युद्ध का चेहरा बदल रहे हैं।
  • रियल–टाइम इंटेलिजेंस: किसी स्थिति को कुछ ही सेकंड में समझकर (Sensing), विश्लेषण कर (Understanding) और तुरंत निर्णय लेकर कार्रवाई करना (Acting) ही जीत की कुंजी है।

 

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Speed, Precision, Information और Integration: नए सैन्य स्तंभ

भविष्य की सैन्य शक्ति चार मुख्य स्तंभों पर टिकी होगी: Speed (गति), Precision (सटीकता), Information (सूचना), और Integration (एकीकरण)।

केवल महंगे सैन्य प्लेटफॉर्म खरीदना पर्याप्त नहीं है; नेटवर्क-आधारित युद्ध क्षमता (Network-centric warfare) और रियल-टाइम सूचना का निर्बाध प्रवाह होना अनिवार्य है। इसके अलावा, विरोधी की संचार एवं निगरानी क्षमताओं को बाधित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) में महारत हासिल करना सबसे बड़ी रणनीतिक आवश्यकता है।

 

आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन: राष्ट्रीय ताकत की नींव

राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत“ संकल्प को दोहराते हुए कहा कि भारत रक्षा निर्माण में केवल आयात घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में ही अत्याधुनिक तकनीकों को डिजाइन, विकसित, निर्मित और अपग्रेड करने की क्षमता विकसित कर रहा है।

“आत्मनिर्भरता का मतलब वैश्विक दुनिया से अलग–थलग होना नहीं है, बल्कि रणनीतिक स्वतंत्रता के साथ मित्र राष्ट्रों के साथ तकनीकी सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) को मजबूत करना है।“ — राजनाथ सिंह

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इस अभ्यास के दौरान भारत के स्वदेशी फाइटर जेट LCA Tejas और लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर LCH Prachand ने अपनी युद्ध क्षमता का प्रदर्शन कर भारत की बढ़ती रक्षा निर्माण शक्ति का लोहा मनवाया।

 

Tarang Shakti 2026 का रणनीतिक महत्व: “अलग–अलग विमान, एक आसमान“

भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास Tarang Shakti 2026 का मुख्य उद्देश्य मित्र देशों की वायु सेनाओं के बीच परिचालन समन्वय और अनुभवों का आदान-प्रदान करना है।

  • वैश्विक सहयोग: इस अभ्यास में कई मित्र देशों के लड़ाकू, परिवहन और निगरानी विमानों ने एक साथ जटिल हवाई मिशनों को अंजाम दिया।
  • समुद्री और रणनीतिक सुरक्षा: वैश्विक व्यापार मार्गों और समुद्री Chokepoints में सुरक्षा व्यवधान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है, जिस पर नजर रखना भारत के लिए आवश्यक है।
  • भविष्य का रोडमैप: तरंग शक्ति 2026 से प्राप्त अनुभवों का समावेश भारतीय सेना की Training, Tactics, Technology और Doctrine में किया जाएगा।

 

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1: Tarang Shakti 2026 क्या है?

उत्तर: Tarang Shakti 2026 भारतीय वायुसेना (IAF) की मेजबानी में आयोजित एक बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास है, जिसमें विभिन्न मित्र देशों की वायु सेनाएं भाग लेकर संयुक्त रणनीति और इंटरऑपरेबिलिटी का परीक्षण करती हैं।

प्रश्न 2: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भविष्य के युद्धों के लिए किन तकनीकों को महत्वपूर्ण बताया?

उत्तर: उन्होंने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), ड्रोन, अनमैन्ड सिस्टम्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, साइबर क्षमता और लॉन्ग-रेंज प्रिसीजन वेपन्स को भविष्य के युद्धों का मुख्य आधार बताया।

प्रश्न 3: Tarang Shakti 2026 में किन भारतीय स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स ने भाग लिया?

उत्तर: भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान LCA Tejas और लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर LCH Prachand ने अभ्यास में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

 

Disclaimer (अस्वीकरण)

यह लेख रक्षा मंत्रालय के वक्तव्य एवं बहुराष्ट्रीय अभ्यास तरंग शक्ति 2026 की सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित विश्लेषणात्मक समाचार सामग्री है। इसका उद्देश्य सूचना एवं शैक्षणिक जागरूकता प्रदान करना है।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।