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लखीमपुर खीरी: सामूहिक धर्मांतरण की बड़ी साजिश नाकाम, 70 से अधिक लोगों की मौजूदगी, 4 गिरफ्तार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में पुलिस ने अवैध धर्मांतरण के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। मितौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुरजीपुरवा गांव में कथित रूप से प्रार्थना सभा की आड़ में सामूहिक धर्मांतरण का खेल चल रहा था, जिसे पुलिस और स्थानीय लोगों की सक्रियता से समय रहते रोक दिया गया।

प्रार्थना सभा के नाम पर चल रहा था ‘धर्मांतरण का खेल’

पुलिस को सूचना मिली थी कि सुरजीपुरवा गांव के एक निजी आवास में भारी संख्या में ग्रामीणों को इकट्ठा किया गया है। जब पुलिस टीम मौके पर पहुँची, तो वहाँ 70 से अधिक पुरुष और महिलाएं मौजूद पाए गए। जाँच में सामने आया कि ‘प्रार्थना सभा’ के नाम पर भोले-भाले ग्रामीणों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

प्रलोभन और बीमारियों के इलाज का दावा

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आरोपी मुख्य रूप से गरीब और कम पढ़े-लिखे ग्रामीणों को अपना निशाना बना रहे थे। उन्हें निम्नलिखित तरीकों से बरगलाया जा रहा था:

  • आर्थिक प्रलोभन: धर्म परिवर्तन करने के बदले पैसे और बेहतर जीवन का लालच।

  • चमत्कारी इलाज: असाध्य बीमारियों को प्रार्थना के जरिए ठीक करने का झूठा दावा।

  • भ्रामक प्रचार: अन्य धर्मों के विरुद्ध गलत जानकारी फैलाना।

4 मुख्य आरोपियों पर FIR दर्ज

घटनास्थल पर हिंदू संगठनों के कड़े विरोध और हंगामे के बाद पुलिस ने स्थिति को संभाला। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 4 मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। इन सभी के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस का बयान: “मौके से भारी मात्रा में आपत्तिजनक धार्मिक साहित्य, पंपलेट्स और प्रचार सामग्री बरामद की गई है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस नेटवर्क की गहराई का पता लगाया जा सके।”

जिले भर में सघन तलाशी अभियान

लखीमपुर खीरी पुलिस ने इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य संदिग्ध इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी है। हाल ही में एक अन्य इसी तरह के मामले में भी कुछ संदिग्धों को पकड़कर न्यायालय में पेश किया गया था। पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन या दबाव में न आएं और ऐसी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत नजदीकी थाने में दें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।